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البَقَرَة /

आयत 245

2 : 245
البَقَرَة आयतें 286
सूरह · البَقَرَة
हिन्दी · Omari
2 : 245

مَّن ذَا ٱلَّذِي يُقۡرِضُ ٱللَّهَ قَرۡضًا حَسَنٗا فَيُضَٰعِفَهُۥ لَهُۥٓ أَضۡعَافٗا كَثِيرَةٗۚ وَٱللَّهُ يَقۡبِضُ وَيَبۡصُۜطُ وَإِلَيۡهِ تُرۡجَعُونَ

कौन है वह जो अल्लाह को अच्छा क़र्ज़ दे, तो वह उसे उसके लिए बहुत अधिक गुना बढ़ा दे, तथा अल्लाह ही तंगी करता और विस्तार करता है और तुम उसी की ओर लौटाए जाओगे।

Explanation & meanings · 1
  1. अर्थात जिहाद के लिए धन ख़र्च करना अल्लाह को उधार देना है।