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هُود /

आयत 30

11 : 30

आयत 30 of هُود (11 : 30). This page carries the verse in the Uthmani script with a translation of its meaning, at a stable URL that can be cited on its own.

هُود आयतें 123
सूरह · هُود
हिन्दी · Omari
11 : 30

وَيَٰقَوۡمِ مَن يَنصُرُنِي مِنَ ٱللَّهِ إِن طَرَدتُّهُمۡۚ أَفَلَا تَذَكَّرُونَ

और ऐ मेरी जाति के लोगो! अल्लाह के मुक़ाबले में कौन मेरी सहायता करेगा, यदि मैं उन्हें अपने पास से निष्कासित कर दूँ? क्या तुम विचार नहीं करते?

Explanation & meanings · 1
  1. अर्थात अल्लाह की पकड़ से कौन बचाएगा, जिसके पास ईमान और कर्म की प्रधानता है, धन-धान्य की नहीं।