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जिस बंदे के क़दम अल्लाह के रास्ते में धूल धूसरित हो गए, उसे (जहन्नम की) आग नहीं छूएगी।

अबू अब्स अब्दुर रहमान बिन जब्र रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है :

"जिस बंदे के क़दम अल्लाह के रास्ते में धूल धूसरित हो गए, उसे (जहन्नम की) आग नहीं छूएगी।"

«مَا اغْبَرَّتْ قَدَمَا عَبْدٍ فِي سَبِيلِ اللَّهِ فَتَمَسَّهُ النَّارُ».

इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है
स़ह़ीह़
स्पष्टीकरण

अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने खुशखबरी दी है कि जहन्नम की आग उस व्यक्ति को नहीं छू सकती जिसके पैर अल्लाह के मार्ग में लड़ते हुए धूल से सन गए।

हदीस के कुछ फ़ायदे

अल्लाह के मार्ग में जिहाद करने वाले मुजाहिद के लिए सुसमाचार कि उसे जहन्नम की आग छू नहीं सकती।

धूल अगरचे पूरे शरीर पर लगती है, परन्तु पैरों का उल्लेख विशेष रूप से इसलिए किया गया है कि उस समय अधिकांश मुजाहिदीन (योद्धा) पैदल ही लड़ते थे तथा सभी परिस्थितियों में धूल पैरों में लगती ही है।

इब्ने हजर का कथन है; जब धूल लगने मात्र से जहन्नम हराम हो जाती है, तो उस व्यक्ति के क्या कहने, जो पूरी ताक़त और छमता से युद्ध में शामिल हो।

समीक्षक

सह़ीह़ बुख़ारी (4/ 20) (2811).

(2/ 7) (907).

अधिक (8)

بهجة الناظرين شرح رياض الصالحين.

لسليم الهلالي (2/ 424).

التنوير شرح الجامع الصغير.

للصنعاني (7/ 361).

فيض القدير شرح الجامع الصغير.

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لمجموعة من الباحثين (2/ 911).