"अगली सफ़ को पूरा करो, फिर उसके बाद वाली को, और यदि (नमाज़ियों की संख्या कम होने के कारण) सफ़ में कोई कमी रह जाए, तो वह सबसे पिछली सफ़ में होनी चाहिए।"
अनस रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है :
"अगली सफ़ को पूरा करो, फिर उसके बाद वाली को, और यदि (नमाज़ियों की संख्या कम होने के कारण) सफ़ में कोई कमी रह जाए, तो वह सबसे पिछली सफ़ में होनी चाहिए।"
«أَتِمُّوا الصَّفَّ المُقَدَّمَ، ثُمَّ الَّذِي يَلِيهِ، فَمَا كَانَ مِنْ نَقْصٍ فَلْيَكُنْ فِي الصَّفِّ المُؤَخَّرِ».
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने जमात के साथ नमाज़ पढ़ने वाले पुरुषों को आदेश दिया कि सर्वप्रथम पहली सफ़ को पूरा करें, फिर उसके बाद वाली सफ़ को, और इसी तरह आगे भी। अगर किसी सफ़ में कोई कमी रह जाए, तो यह कमी अंतिम सफ़ में रहे।
सफ़ों को सीधा करने की सुन्नत का बयान।
नमाज़ियों को आगे की सफ़ों में कमी नहीं छोड़नी चाहिए, बल्कि कमी आख़िरी सफ़ में होनी चाहिए।
सुनन अबू दावूद (2/ 10) (671).
सुनन नसई (2/ 93) (818).
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شرح سنن أبي داود للعباد (89/ 25).
पुस्तकों में उद्धृत
2 पुस्तकेंअधिक (2)
- رياض الصالحينرياض الصالحين مع فوائد وهدايات - 5«أَتِمُّوا الصَّفَّ المقدَّمَ، ثُمَّ الَّذي يليهِ، فمَا كان مِن نَقْصٍ فَلْيَكُنْ في الصَّفِّ المُؤخَّر».
- مجموعة زاد الفقه (2)الفقه للمستوى الثاني ( مجموعة زاد )«أَتِمُّوا الصَّفَّ الْمُقَدَّمَ، ثُمَّ الَّذِي يَلِيهِ، فَمَا كَانَ مِنْ نَقْصٍ فَلْيَكُنْ فِي الصَّفِّ الْمُؤَخَّرِ».