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621 हदीसें

नबवी हदीसों का विश्वकोश

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हदीस का दर्जा

मैं अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से सुनी हुई हर बात को इस इरादे से लिख लिया करता था कि वह सुरक्षित रह जाए। लेकिन मुझे इससे क़ुरैश ने मना कर दिया और कहा कि क्या तुम अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से सुनी हुई हर बात को लिख लिया करते हो, जबकि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम एक इन्सान हैं, जो क्रोध तथा प्रसन्नता की अवस्था में बात करते हैं? अतः मैंने लिखना बंद कर दिया और अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के सामने इसका ज़िक्र किया तो आपने अपनी उंगली से अपने मुँह की ओर इशारा किया और फ़रमाया : "तुम लिखा करो। उस हस्ती की क़सम, जिसके हाथ में मेरी जान है, इस (मुंह) से केवल सत्य ही निकलता है।"
स़ह़ीह़ इसे अबू दावूद ने रिवायत किया है
रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब सहाबा-ए-किराम रज़ियल्लाहु अन्हुम को आदेश देते तो उन्ही कामों का आदेश देते, जिनको वह आसानी से कर सकते थे । उन्होंने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! हमारा हाल आप जैसा नहीं है। अल्लाह ने तो आपकी अगली पिछली हर कोताही से दरगुज़र फ़रमाया है!! यह सुनकर आप इतना नाराज़ हुए कि आपके चेहरे पर ग़ुस्से का असर ज़ाहिर हुआ, फिर आपने फ़रमाया : "मैं तुम सब से ज़्यादा परहेज़गार और अल्लाह को जानने वाला हूँ।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है
मैं बनू आमिर के एक प्रतिनिध मंडल के साथ अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास गया। वहाँ पहुँचकर हमने कहा : आप हमारे 'सैय्यिद' (अधिपति) हैं। तो आपने कहा : 'सैय्यिद' (अधिपति) तो अल्लाह है।" हमने कहा : आप हमारे बीच सबसे उत्तम और सबसे उपकार करने वाले व्यक्ति हैं। तो आपने कहा : "तुम मुझे अपने साधारण शब्दों से संबोधित करो अथवा कुछ साधारण शब्दों से संबोधित करो और देखो कहीं शैतान तुम्हें अपना प्रवक्ता न बना ले।"
स़ह़ीह़ इस ह़दीस़ को अबू दावूद और अह़मद ने रिवायत किया है
"मेरी उम्मत के सारे लोग जन्नत में प्रवेश करेंगे, सिवाय उसके, जो इनकार करेगा।" कहा गया कि ऐ अल्लाह के रसूल! भला इनकार कौन करेगा? तो फ़रमाया : "जो मेरे आदेशों का पालन करेगा, वह जन्नत में प्रवेश करेगा और जो मेरी अवज्ञा करेगा, वही इनकार करने वाला होगा।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर चालीस साल की उम्र में वह्य उतरी। फिर आप तेरह साल तक मक्का में रहे। उसके बाद आपको हिजरत (पलायन) का आदेश हुआ तो आपने मदीना की तरफ हिजरत (पलायन) किया और आप वहाँ दस बरस रहे। इसके बाद आपने मृत्यु पाई।
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
"मुझे पाँच चीज़ें ऐसी दी गई हैं, जो मुझसे पहले किसी नबी को दी नहीं गई थीं। एक महीने की मसाफ़त तक जाने वाले प्रताप द्वारा मेरा सहयोग किया गया है। मेरे लिए धरती को नमाज़ पढ़ने का स्थान एवं पवित्रता प्राप्त करने का साधन बनाया गया है। लिहाज़ा मेरी उम्मत का जो व्यक्ति जहाँ नमाज़ का समय पाए, वह वहीं नमाज़ अदा कर ले। मेरे लिए ग़नीमत का धन हलाल किया गया है। मुझसे पहले किसी के लिए ग़नीमत का धन हलाल न था। मुझे सिफ़ारिश करने का अधिकार दिया गया है। दूसरे नबी अपने-अपने समुदायों की ओर नबी बनाकर भेजे जाते थे। लेकिन मुझे तमाम इन्सानों की ओर नबी बनाकर भेजा गया है।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
"क़सम है उस ज़ात की जिसके हाथ में मोहम्मद की जान है, मेरे विषय में इस उम्मत का जो व्यक्ति भी सुने, चाहे वह यहूदी हो या ईसाई, फिर वह उस चीज़ पर ईमान न लाए, जिसके साथ मैं भेजा गया हूँ, तो वह जहन्नमी होगा।"
स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
"उस हस्ती की क़सम, जिसके हाथ में मेरी जान है, वह समय बहुत ही निकट है, जब तुम्हारे बीच मरयम के बेटे न्यायकारी शासक के रूप में उतरेंगे। वह सलीब तोड़ देंगे, सूअर का वध करेंगे, जिज़्या (वेशेष लगान) हटा देंगे और धन की इतनी बहुतायत हो जाएगी कि कोई उसे ग्रहण नहीं करेगा।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है