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621 हदीसें

नबवी हदीसों का विश्वकोश

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हदीस का दर्जा

"अल्लाह ज़मीन को अपनी मुट्ठी में ले लेगा तथा आकाशों को अपने दाएँ हाथ में लपेट लेगा और फिर कहेगा : मैं ही बादशाह हूँ। कहाँ हैं धरती के बादशाह?"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
"निश्चय ही अल्लाह अत्याचारी को छूट देता रहता है और जब पकड़ता है, तो छोड़ता नहीं है।" फिर आपने यह आयत पढ़ी : {इसी प्रकार तुम्हारे रब की पकड़ होती है जब वह अत्याचरी बस्ती को पकड़ता है, और निश्चय ही उसकी पकड़ बहुत सख़्त व दुखद है।} [सूरा हूद : 102]
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "अल्लाह कहता है : आदम की संतान ने मुझे झुठलाया, हालाँकि उसे ऐसा करने का हक नहीं था। मुझे गाली दी, हालाँकि ऐसा करने का उसे कोई अधिकार नहीं था। उसका मुझे झुठलाना उसका यह कहना है कि उसने मुझे जिस प्रकार पहली बार पैदा किया है, उस प्रकार दोबारा पैदा नहीं करेगा, जबकि पहली बार पैदा करना मेरे लिए दूसरी बार पैदा करने से अधिक आसान नहीं था। उसका मुझे गाली देना,उसका यह कहना है कि अल्लाह ने पुत्र बना लिया है, हालाँकि मैं एक हुं तथा तमाम संपूर्ण गुणों में सम्पूर्णता से वेशेषित हूँ, न मैंने जना है और न ही जना गया हूँ और कोई मेरी बराबरी का नहीं है।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है
अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : "उच्च एवं महान अल्लाह कहता है : मैं अपने बारे में अपने बंदे की सोच के निकट होता हूँ तथा मैं उसके साथ होता हूँ, वह जब भी मुझे याद करे। अगर वह अपने मन में मुझे याद करता है, तो मैं भी उसे अपने मन में याद करता हूँ। अगर वह किसी सभा में मेरा ज़िक्र करता है, तो मैं उसका ज़िक्र ऐसी सभा में करता हूँ, जो उसकी सभा से बेहतर होती है। अगर वह मेरी ओर एक बित्ता आता है, मैं उसकी ओर एक हाथ जाता हूँ, और अगर मेरी ओर एक हाथ आता है, मैं उसकी ओर दो हाथ जाता हूँ तथा अगर मेरी ओर चलकर आता है, मैं उसकी ओर दौड़कर जाता हूँ।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
"हमारा बरकत वाला तथा उच्च रब हर रात, जबकि रात का एक तिहाई भाग शेष रह जाता है, दुनिया से निकट वाले आसमान पर उतरकर फरमाता है : कौन है जो दुआ करे कि मैं उसे क़बूल करूँ; कौन है जो मुझसे माँगे कि मैं उसे प्रदान करूँ, कौन है जो मुझसे क्षमा माँगे कि मैं उसे क्षमा कर दूँॽ''
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है