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621 हदीसें

नबवी हदीसों का विश्वकोश

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"अल्लाह तुम्हारे रूप और तुम्हारे धनों को नहीं देखता, बल्कि तुम्हारे दिलों और कर्मों को देखता है।"
स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
"जन्नत, तुममें से किसी व्यक्ति से उसके जूते के फीते से भी अधिक निकट है तथा नर्क का भी यही हाल है।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है
"तुममें से कोई उस समय तक मोमिन नहीं हो सकता, जब तक मैं उसके निकट, उसके पिता, उसकी संतान और तमाम लोगों से अधिक प्यारा न हो जाऊँ।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
"जो मुझे दोनों दाढ़ों के बीच तथा दोनों पैरों के बीच (के अंगों) की गारंटी दे दे, मैं उसे जन्नत की गारंटी देता हूँ।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है
रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अपनी मृत्यु के समय न कोई दिरहम छोड़ा, न दीनार, न कोई ग़ुलाम और न लौंडी, और न कोई चीज़, सिवाय अपने सफेद ख़च्चर, अपने हथियार और एक ज़मीन के, जिसे आप सदक़ा कर चुके थे।
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है
मैंने अम्मार बिन यासिर को देखा कि वह मस्जिद में दाखिल हुए और हल्की नमाज़ पढ़ी। जब वह बाहर निकले, तो मैं उनके पास गया और कहा : ऐ अबू यक़ज़ान! आपने तो बहुत हल्की नमाज़ पढ़ी है। उन्होंने कहा : तो क्या तुमने मुझे नमाज़ के किसी हिस्से में कोई कमी करते हुए देखा?! मैंने कहा : नहीं। उन्होंने कहा : मैंने तो इसके द्वारा शैतान के बहकावे से बचने में जल्दी की है। मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को कहते हुए सुना है : "बेशक बंदा नमाज़ पढ़ता है, लेकिन उसके लिए उसमें से केवल दसवाँ, नौवाँ, आठवाँ, सातवाँ, छठा, पाँचवाँ, चौथाई, तिहाई या आधा हिस्सा ही लिखा जाता है।"
ह़सन इसे अह़मद ने रिवायत किया है
"मोमिन का मामला भी बड़ा अजीब है। उसके हर काम में उसके लिए भलाई है। जबकि यह बात मोमिन के सिवा किसी और के साथ नहीं है। यदि उसे ख़ुशहाली प्राप्त होती है और वह शुक्र करता है, तो यह भी उसके लिए बेहतर है और अगर उसे तकलीफ़ पहुँचती है और सब्र करता है. तो यह भी उसके लिए बेहतर है।"
स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
मैंने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! मुक्ति क्या है? आपने उत्तर दिया : "अपनी ज़बान पर नियंत्रण रखो, अपने घर के अंदर ही रहा करो और अपने गुनाहों पर रोया करो।"
स़ह़ीह़ इसे तिर्मिज़ी और अह़मद ने रिवायत किया है