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621 हदीसें

नबवी हदीसों का विश्वकोश

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"अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम एक सूरा ख़त्म होकर दूसरा सूरा शुरू होने की बात जान नहीं पाते, जब तक आपपर "बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम" न उतरती।"
स़ह़ीह़ इसे अबू दावूद ने रिवायत किया है
"हम (मासिक धर्म से) पाक होने के बाद मटमैले और पीले रंग के पानी को कुछ शुमार नहीं करती थीं।"
स़ह़ीह़ इस ह़दीस़ को अबू दावूद ने इन शब्दों के साथ रिवायत किया है। जबकि बुख़ारी ने (بعد الطهر, अर्थात; पवित्र हो जाने के बाद) की वृद्धि के बिना रिवायत किया है
"जिसने अल्लाह के अतिरिक्त किसी और की क़सम खाई, उसने क़ुफ़्र अथवा शिर्क किया।"
स़ह़ीह़ इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी और अह़मद ने रिवायत किया है
"जब तुममें से कोई अपने भाई से मिले, तो उसे सलाम करे। फिर, अगर दोनों के बीच पेड़, दीवार या पत्थर आ जाए और वह उससे (दोबारा) मिले, तो फिर उसे सलाम करे।"
स़ह़ीह़ इसे अबू दावूद ने रिवायत किया है
"ऐसे कोई दिन नहीं हैं, जिनमें नेकी के काम करना अल्लाह के निकट इन (दस) दिनों में नेकी के काम करने से अधिक प्रिय हों।" आपकी मुराद ज़ुल-हिज्जा महीने के शुरू के दस दिन हैं। सहाबा ने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! अल्लाह के मार्ग में जिहाद करना भी नहीं? आपने उत्तर दिया : "नहीं, अल्लाह के रास्ते में जिहाद भी नहीं, सिवाय उस व्यक्ति के, जो जान तथा माल के साथ निकलता हो और फिर उनमें से कुछ भी लेकर वापस न आता हो।"
स़ह़ीह़ इस ह़दीस़ को बुख़ारी और अबू दावूद ने रिवायत किया है, तथा शब्द अबू दावूद के हैं
"कोई भी बंदा जब कोई गुनाह करता है, फिर खड़े होकर पवित्रता अरजन करता है, फिर नमाज़ पढ़ता है, फिर अल्लाह से क्षमा याचना करता है, तो अल्लाह उसे क्षमा कर देता है।" फिर आपने यह आयत पढ़ी : {وَالَّذِينَ إِذَا فَعَلُوا فَاحِشَةً أَوْ ظَلَمُوا أَنْفُسَهُمْ ذَكَرُوا اللهَ فَاسْتَغْفَرُوا لِذُنُوبِهِمْ} "और जब कभी वे कोई बड़ा पाप कर जाएँ अथवा अपने ऊपर अत्याचार कर लें, तो अल्लाह को याद करते हैं, फिर अपने पापों के लिए क्षमा माँगते हैं।" [सूरा आल-ए-इमरान: 135]
स़ह़ीह़ इसे अबू दावूद ने, तिर्मिज़ी ने तथा नसई ने अल-कुबरा में इसी प्रकार इब्न-ए-माजह ने और अह़मद ने रिवायत किया है
"वली (अभिभावक) के बिना निकाह (शादी) नहीं है।"
स़ह़ीह़ इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया है
"जिसने नक्षत्र के ज्ञान का कुछ अंश प्राप्त किया, उसने जादू का कुछ अंश प्राप्त किया। वह आगे नक्षत्र के बारे में जितना ज्ञान प्राप्त करता जाएगा, जादू के बारे में उतना ही ज्ञान बढ़ाता जाएगा।"
स़ह़ीह़ इस ह़दीस़ को अबू दावूद, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया है