Skip to content
621 हदीसें

नबवी हदीसों का विश्वकोश

परिणाम फ़िल्टर करें

621 में से 36 कार्ड

फ़िल्टर हटाएँ
"तुमने एक बहुत बड़ी चीज़ के बारे में पूछा है, परन्तु जिसके लिए अल्लाह तआला आसान कर दे, उसके लिए यह निश्चय ही आसान है : तुम अल्लाह की इबादत करो, किसी को उसका साझी न बनाओ, नमाज़ क़ायम करो, ज़कात दो, रमज़ान के रोज़े रखो और अल्लाह के घर काबा का हज करो।" फिर फ़रमायाः "क्या मैं तुम्हें भलाई के द्वार न बता हूँ? रोज़ा ढाल है, सदक़ा गुनाह की आग को बुझा देता है, जैसे पानी आग को बुझा देता है तथा आदमी का रात के अंधेरे में नमाज़ पढ़ना।" फिर यह आयत पढ़ी (जिसका अर्थ है) : ((उनके पहलू बिस्तरों से अलग रहते हैं। वह अपने रब को भय एवं लालच के साथ पुकारते हैं और हमारी दी हुई चीज़ों में से खर्च करते रहते हैं। कोई प्राणी नहीं जानता कि हमने उनके लिए क्या कुछ आँखों की ठंडक छिपा रखी है, उनके उन कर्मों के प्रतिफल के तौर पर, जो वे किया करते थे।)) फिर फ़रमाया : "क्या मैं तुम्हें इस मामले का सिरा, उसका स्तंभ और उसकी सबसे ऊँटी चोटी न बता दूँ?" मैंने कहा : अवश्य, ऐ अल्लाह के रसूल! तो फ़रमाया : "इस मामले का सिरा इसलाम है, उसका स्तंभ नमाज़ है और उसकी सबसे ऊँची चोटी जिहाद है।" फिर फ़रमाया : "क्या मैं तुम्हें इन तमाम वस्तुओं का सार न बता दूँ?" मैंने कहा : अवश्य, ऐ अल्लाह के रसूल! तो आपने अपनी ज़बान को पकड़कर कहा : "इसे संभालकर रखो।" मैंने कहा : ऐ अल्लाह के नबी, क्या हम जो कुछ बोलते हैं, उसपर भी हमारी पकड़ होगी? तो फ़रमाया : "तुम्हारी माँ तुम्हें गुम पाए, भला लोगों को जहन्नम की आग में उनके चेहरों के बल (या कहा कि उनके नथनों के बल) ज़बान की तेज़ी के सिवा और कौन-सी चीज़ डालेगी?”
स़ह़ीह़ इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है
"इस्लाम की बुनियाद पाँच चीज़ों पर क़ायम है : इस बात की गवाही देना कि अल्लाह के अतिरिक्त कोई सत्य पूज्य नहीं है और मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अल्लाह के रसूल हैं, नमाज़ स्थापित करना, ज़कात देना, हज करना और रमज़ान मास के रोज़े रखना।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
"मुझे आदेश दिया गया है कि लोगों से युद्ध करूँ, यहाँ तक कि वे इस बात की गवाही दें कि अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है और मुहम्मद अल्लाह के रसूल हैं, नमाज़ क़ायम करें और ज़कात अदा करें। अगर उन्होंने इतना कर लिया तो अपनी जान तथा माल को इस्लाम के अधिकार के सिवा हमसे सुरक्षित कर लिया और उनका हिसाब अल्लाह पर है।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
उन्होंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! मुझे बताइए कि अगर मेरा किसी काफ़िर से सामना हो जाए और हम एक-दूसरे से लड़ाई शुरू कर दें तथा वह मेरे एक हाथ पर तलवार मारकर उसे काट दे एवं उसके बाद मुझसे बचने के लिए एक पेड़ की आड़ में छुप जाए और कहने लगे कि मैंने अल्लाह के लिए इस्लाम क़बूल कर लिया, तो क्या मैं ऐसा कहने के बाद उसका क़ल्त कर दूँ? आपने फ़रमाया : "उसे क़त्म मत करो।" मैंने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! उसने तो मेरा एक हाथ काट दिया और हाथ काटने के बाद ऐसा कहा? (क्या फिर भी उसे क़त्ल नहीं करना चाहिए?) आपने फ़रमाया : "उसे क़त्ल न करो। अगर तुम उसे क़त्ल कर दोगे, तो वह उस स्थान पर आ जाएगा, जिसपर उसका क़त्ल करने से पहले तुम थे और तुम उस स्थान पर चले जाओगे, जिसपर वह इस वाक्य को कहने से पहले था।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
मैंने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! इब्न-ए-जुदआन जाहिलियत के ज़माने में रिश्ते-नातों का ख़्याल रखता था और निर्धनों को खाना खिलाता था। क्या यह बातें उसके लिए लाभकारी सिद्ध होंगी? आपने कहा : "इन कामों का उसे कोई लाभ नहीं मिलेगा। उसने कभी यह नहीं कहा : ऐ मेरे रब! प्रतिफल के दिन मेरे गुनाह माफ़ कर देना।"
स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
"ईमान वालों का उदाहरण, उनके एक-दूसरे से प्रेम, दया और करुणा में, शरीर की तरह है, कि जब उसका कोई अंग कष्ट में होता है, तो पूरा शरीर जागने एवं बुख़ार के कष्ट में उसके साथ होता है।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
"मुनाफ़िक़ों पर सबसे भारी नमाज़ इशा और फ़ज्र की नमाज़ है और अगर उन्हें इन नमाज़ों के सवाब का अंदाज़ा हो जाए, तो घुटनों को बल चलकर आएँ। मैंने तो (एक बार) इरादा कर लिया था कि किसी को नमाज़ पढ़ाने का आदेश दूँ और वह नमाज़ पढ़ाए, फिर कुछ लोगों को साथ लेकर, जो लकड़ी गट्ठर लिए हुए हों, ऐसे लोगों के यहाँ जाऊँ, जो नमाज़ के लिए नहीं आते और उनको उनके घरों के साथ जला डालूँ।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
एक यात्रा में मैं अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथ था। चलते हुए एक दिन मैं आपसे निकट हो गया, तो मैंने कहा : हे अल्लाह के रसूल! मुझे ऐसा कार्य बताइए जो मुझे जन्नत में प्रवेश दिलाए तथा जहन्नम से दूर कर दे। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया : “तुमने एक गंभीर प्रश्न पूछा है, परंतु यह उसके लिए आसान है, जिसके लिए अल्लाह आसान बना दे : अल्लाह की इबादत करो और उसके साथ किसी को साझी न बनाओ, नमाज़ स्थापित करो, ज़कात दो, रमज़ान के रोज़े रखो और अल्लाह के घर का हज करो।" फिर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया : "क्या मैं तुम्हें भलाई के द्वारों के बारे में न बताऊँ? रोज़ा ढाल है, और दान पापों को बुझा देता है, जैसे पानी आग को बुझा देता है, तथा व्यक्ति की रात में अदा की गई नमाज़ (भी भलाई के द्वारों में से एक है)।" तत्पश्चात् आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने यह आयत पढ़ी : تَتجَافَى جُنُوبُهُمْ عَنِ الْمَضَاجِعِ, (उनके पहलू बिस्तरों से अलग रहते हैं, अपने रब को भय एवं आशा के साथ पुकारते हैं और जो कुछ हमने उन्हें दे रखा है, वह खर्च करते हैं। कोई व्यक्ति नहीं जानता जो कुछ हमने आँखों की ठंडक उनके लिए छुपा रखी है। जो उसी का बदला है, जो किया करते थे।) फिर आप ने फ़रमाया : "क्या मैं तुम्हें दीन की बुनियाद, उसका स्तंभ और उसकी चोटी न बता दूँ? मैंने कहा : अवश्य, हे अल्लाह के रसूल! आपने फ़रमाया : दीन की बुनियाद इस्लाम है, इसका स्तंभ नमाज़ है और इसकी चोटी जिहाद है।" इसके बाद आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनसे कहा : "क्या मैं तुम्हें इसका सार न बताऊँ?" मैंने कहा : अवश्य, हे अल्लाह के रसूल। तो आपने अपनी जीभ पकड़ी और कहा : “इसे रोके रखो।" मैंने कहा : हे अल्लाह के नबी ! क्या हम जो बोलते हैं, उसपर भी हमारी पकड़ होगी? तो आपने फ़रमाया : "तुम्हारी माँ तुम्हें खो दे! लोगों को उनके चेहरों के बल या उनकी नाकों के बल (जहन्नम में) उनकी जीभों की कमाई के कारण ही तो गिराया जाएगा।”
सभी सनदों के आधार पर स़़ह़ीह़ इसे तिर्मिज़ी, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया है