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621 हदीसें

नबवी हदीसों का विश्वकोश

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"जो भी सोना या चाँदी रखने वाला व्यक्ति अपने उस धन का हक़ (ज़कात) अदा नहीं करता, उसके लिए क़यामत के दिन आग की तख़्तियाँ तैयार की जाएँगी और उन्हें जहन्नम की आग में तपाया जाएगा, फिर उनसे उसके पहलू, उसकी पेशानी और पीठ को दागा जाएगा। जब-जब तख़्तियाँ ठंडी हो जाएँगी, उन्हें दोबारा गर्माया जाएगा। यह अज़ाब एक ऐसे दिन में होगा, जिसकी अवधि पचास हज़ार साल के बराबर होगी। (यह सिलसिला जारी रहेगा) यहाँ तक कि बंदों के दर्मियान फ़ैसला कर दिया जाए और (अज़ाब में गिरफ़्तार व्यक्ति) जन्नत या जहन्नम की ओर जाने वाले अपने रास्ते को देख ले।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
"क़यामत के दिन किसी बंदे के पांव उस समय तक नहीं हिलेंगे, जब तक उसकी आयु के बारे में न पूछ लिया जाए कि उसे किस काम में लगाया और उसके ज्ञान के बारे में न पूछ लिया जाए कि उससे क्या किया तथा उसके धन के बारे में न पूछ लिया जाए कि उसे कहाँ से कमाया और कहाँ खर्च किया और उसके शरीर के बारे में न पूछ लिया जाए कि उसे कहाँ खपाया?"
स़ह़ीह़ इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है
जब यह आयत : {ثُمَّ لَتُسْأَلُنَّ يَوْمَئِذٍ عَنِ النَّعِيمِ} (फिर निश्चय तुम उस दिन नेमतों के बारे में अवश्य पूछे जाओगे।) [सूरा अल-तकासुर : 8] उतरी, तो ज़ुबैर रज़ियल्लाहु अनहु ने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! हमसे किस नेमत के बारे में पूछा जाएगा? हमारे पास तो दो ही काली चीज़ें हैं। खजूर तथा पानी। आपने उत्तर दिया : "देखो, तुमसे सवाल तो क्या ही जाएगा।"
ह़सन इस ह़दीस़ को तिर्मिज़ी और इब्न-ए-माजह ने रिवायत किया है
''जिसने अज़ान सुनते समय यह दुआ पढ़ी : "ऐ अल्लाह! इस संपूर्ण आह्वान तथा खड़ी होने वाली नमाज़ के रब! मुहम्मद -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को वसीला (जन्नत का सबसे ऊँचा स्थान) और श्रेष्ठतम दर्जा प्रदान कर और उन्हें वह प्रशंसनीय स्थान प्रदान कर, जिसका तूने उन्हें वचन दिया है।" उसके लिए क़यामत के दिन मेरी सिफ़ारिश अनिवार्य हो जाएगी।''
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है
"क्या तुम जानते हो कि निर्धन कौन है?" सहाबा ने कहा : हमारे यहाँ निर्धन वह है, जिसके पास न दिरहम हो न सामान। आपने कहा : "मेरी उम्मत का निर्धन वह व्यक्ति है, जो क़यामत के दिन नमाज़, रोज़ा और ज़कात के साथ आएगा, लेकिन इस अवस्था में उपस्थित होगा कि किसी को गाली दी होगी, किसी पर दुष्कर्म का आरोप लगा रखा होगा, किसी का रक्त बहा रखा होगा और किसी को मार रखा होगा। अतः उसकी कुछ नेकियाँ इसे दे दी जाएँगी और कुछ नेकियाँ उसे दे दी जाएँगी। फिर अगर उसके ऊपर जो अधिकार हैं, उनके भुगतान से पहले ही उसकी नेकियाँ समाप्त हो जाएँगी, तो हक़ वालों के गुनाह लेकर उसके ऊपर डाल दिए जाएँगे और फिर उसे आग में फेंक दिया जाएगा।"
स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है