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621 हदीसें

नबवी हदीसों का विश्वकोश

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"तुम लोग मेरे प्रति प्रशंसा और तारीफ़ में उस प्रकार अतिशयोक्ति न करो, जिस प्रकार ईसाइयों ने मरयम के पुत्र के बारे किया। मैं केवल अल्लाह का बंदा हूँ। अतः मुझे अल्लाह का बंदा और उसका रसूल कहो।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है
एक व्यक्ति अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास आया और पूछा कि ऐ अल्लाह के रसूल! दो वाजिब करने वाली चीज़ें क्या हैं? आपने उत्तर दिया : "जो इस हाल में मरा कि किसी को अल्लाह का साझी नहीं बनाया, वह जन्नत में प्रवेश करेगा और जो इस हाल में मरा कि किसी को अल्लाह का साझी बनाता रहा, वह जहन्नम में जाएगा।"
स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
"अतिशयोक्ति करने वाले हलाक हो गए।" आपने यह बात तीन बार कही।
स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
"हम नौ, आठ या सात लोग अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास थे कि इसी बीच आपने कहा : "क्या तुम अल्लाह के रसूल से बैअत (अर्थात; निष्ठा की प्रतिज्ञा) नहीं करोगे?" चूँकि हमने कुछ दिन पहले ही आपसे बैअत की थी, इसलिए उत्तर दिया : ऐ अल्लाह के रसूल, हम तो आपसे बैअत कर चुके हैं। आपने फिर कहा : "क्या तुम अल्लाह के रसूल से बैअत नहीं करोगे?" हमने उत्तर दिया : ऐ अल्लाह के रसूल, हम तो आपसे बैअत कर चुके हैं। लेकिन, आपने फिर कहा : "क्या तुम अल्लाह के रसूल से बैअत नहीं करोगे?" अतः, हमने हाथ फैला दिए और कहा : हमने आपसे बैअत कर ली, लेकिन किस बात पर बैअत करें? फ़रमाया : "इस बात पर कि केवल अल्लाह की इबादत करोगे, किसी को उसका साझी नहीं बनाओगे, पाँच वक्त की नमाज़ें पढ़ोगे और अल्लाह का अनुसरण करोगे। -तथा धीरे से एक बात कही- और लोगों से कुछ नहीं माँगोगे।" चुनांचे मैंने उनमें से कुछ लोगों को देखा कि उनका कोड़ा गिर जाता तो किसी से उठाकर देने तक नहीं कहते थे।
स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
"फ़रिश्ते उस घर में प्रवेश नहीं करते जिस घर में कुत्ते और चित्र हों।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब हुनैन युद्ध के लिए निकले, तो मुश्रिकों (बहुदेववादियों) की ओर से पूजे जाने वाले एक पेड़ के पास से गुज़रे, जिसे 'ज़ात-ए-अनवात' कहा जाता था। वे उसमें अपने हथियार लटकाया करते थे। चुनांचे लोगों ने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! उनकी तरह हमारे लिए भी एक 'ज़ात-ए-अनवात' बना दीजिए। उनकी बात सुन अल्लाह के रसूलसल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : सुबहानल्लाह (अल्लाह पवित्र है)! तुम लोग ठीक वैसा ही कह रहे हो, जैसा मूसा की क़ौम ने कहा था। उन्होंने मूसा (अलैहिस्सलाम) से कहा था : "اجْعَلْ لَنَا إِلَهًا كَمَا لَهُمْ آَلِهَةٌ" (हमारे लिए भी कोई पूज्य बना दीजिए, जैसा कि मुश्रिकों के बहुत-से पूज्य हैं।) [अल-आराफ़: 138] सुन लो, तुम लोग भी पहले समुदायों के पदचिह्नों पर चल पड़ोगे।"
स़ह़ीह़ इसे तिर्मिज़ी और अह़मद ने रिवायत किया है
'जो अल्लाह चाहे एवं अमुक चाहे' ना कहो, बल्कि 'जो अल्लाह चाहे फिर अमुक चाहे' कहो।
सभी सनदों के आधार पर स़़ह़ीह़ इसे अबू दावूद ने तथा नसई ने अल-कुबरा में एवं अह़मद ने रिवायत किया है
"ग़ैब की चाबियां पांच हैं, {निःसंदेह, अल्लाह ही के पास है क़यामत का ज्ञान, वही उतारता है वर्षा और जानता है जो कुछ गर्भाशयों में है और नहीं जानता कोई प्राणी कि वह क्या कमायेगा कल और नहीं जानता कोई प्राणी कि किस धरती में मरेगा। वास्तव में, अल्लाह ही सब कुछ जानने वाला, सबसे सूचित है।}"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है