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621 हदीसें

नबवी हदीसों का विश्वकोश

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हदीस का दर्जा

मैंने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को मृत्यु से पाँच दिन पहले कहते सुना है : "मैं अल्लाह के निकट इस बात से बरी होने का एलान करता हूँ कि तुममें से कोई मेरा 'ख़लील' (अनन्य मित्र) हो। क्योंकि अल्लाह ने जैसे इबराहीम को 'ख़लील' बनाया था, वैसे मुझे भी 'ख़लील' बना लिया है। हाँ, अगर मैं अपनी उम्मत के किसी व्यक्ति को 'ख़लील' बनाता, तो अबू बक्र को बनाता। सुन लो, तुमसे पहले के लोग अपने नबियों की कब्रों को मस्जिद बना लिया करते थे। सुन लो, तुम कब्रों को मस्जिद न बनाना। मैं तुम्हें इससे मना करता हूँ।"
स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
"कोई संक्रामकता नहीं और न कोई अपशगुनता। हाँ, मुझे फ़ाल (शगुन) अच्छा लगता है।" सहाबा ने पूछा : शगुन क्या है? फ़रमाया : "अच्छी बात।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
"सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह तुम्हें इस बात से रोकता है कि तुम अपने बाप-दादाओं की क़सम खाओ।" उमर रज़ियल्लाहु अनहु कहते हैं : अल्लाह की क़सम, जिस दिन से मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से यह हदीस सुनी है, मैंने कभी बाप-दादाओं की क़सम नहीं खाई। न जान-बूझकर और न किसी की क़सम नक़ल करते हुए।
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है