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621 हदीसें

नबवी हदीसों का विश्वकोश

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हदीस का दर्जा

"इस्लाम की बुनियाद पाँच चीज़ों पर क़ायम है : इस बात की गवाही देना कि अल्लाह के अतिरिक्त कोई सत्य पूज्य नहीं है और मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अल्लाह के रसूल हैं, नमाज़ स्थापित करना, ज़कात देना, हज करना और रमज़ान मास के रोज़े रखना।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से पूछा कि सबसे बड़ा गुनाह क्या है? तो फ़रमाया : "यह है कि तुम अल्लाह का साझी बनाओ, हालाँकि उसी ने तुम को पैदा किया है।" मैंने कहा : निस्संदेह यह एक बहुत बड़ा गुनाह है। मैंने कहा : फिर कौन-सा? फ़रमाया : "फिर यह कि तुम अपनी संतान को इस भय से मार डालो कि वह तुम्हारे साथ खाएगी।" मैंने कहा : फिर कौन-सा? तो फ़रमाया : "फिर यह कि तुम अपने पड़ोसी की पत्नी से दुष्कर्म करो।"
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"फ़रिश्ते उस घर में प्रवेश नहीं करते जिस घर में कुत्ते और चित्र हों।"
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“अल्लाह तआला जन्नतियों से फ़रमाएगा : ऐ जन्नत वालो! वो कहेंगे : पूरे ध्यान से हाज़िर हैं ऐ हमारे रब और सदा तेरी मेहरबानी के मोहताज हैं। अल्लाह तआला फ़रमाएगा : अब तुम राज़ी हो? वो कहेंगे : क्या अब भी ख़ुश न होंगे, जबकि तूने हमें ऐसी-ऐसी नेमतें प्रदान की हैं, जो अपनी सारी मख़लूक़ में से किसी और को नहीं दीं? फिर अल्लाह तआला इरशाद फ़रमाएगा : क्या मैं तुम्हें एक ऐसी चीज़ न दूँ, जो इन सबसे भी बढ़कर है? वो कहेंगे : ऐ अल्लाह! अब इन सबसे भी बढ़कर और कौन सी चीज़ हो सकती है? तब अल्लाह तआला फ़रमाएगा : मैं अपनी प्रसन्नता तुम्हें प्रदान करता हूँ। अब कभी मैं तुमसे नाराज़ नहीं हूँगा।”
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"संतुलित रहा करो और सीधे चला करो। जान लो कि तुममें से कोई हरगिज़ अपने अमल से मुक्ति नहीं पा सकता।" सहाबा ने कहा : आप भी नहीं, ऐ अल्लाह के रसूल? तो फ़रमाया : "मैं भी नहीं! यह और बात है कि अल्लाह मुझे अपनी दया एवं कृपा में ढाँप ले।"
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मैंने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! मुझसे इस्लाम के बारे में एक ऐसी बात कहें, जिसके बारे में मुझे किसी और से पूछने की ज़रूरत न पड़े। आपने फ़रमाया : "तुम कहो कि मैं अल्लाह पर ईमान लाया और फिर इसपर मज़बूती से क़ायम रहो।"
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"सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह ने फ़रमाया : मैं तमाम साझेदारों की तुलना में साझेदारी से अधिक बेनियाज़ हूँ। जिसने कोई कार्य किया और उसमें किसी को मेरा साझी ठहराया, मैं उसके साथ ही उसके साझी बनाने के इस कार्य से भी किनारा कर लेता हूँ।"
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“अल्लाह जहन्नमियों में सबसे हलका अज़ाब पाने वाले व्यक्ति से कहेगा : यदि धरती में मौजूद सारी चीज़ें तुम्हारी होतीं, तो क्या तुम इस अज़ाब से छुटकारा पाने के लिए वह सारी चीज़ें दे देते? वह आदमी कहेगा : हाँ! अल्लाह फ़रमाएगा : बेशक जब तुम आदम की पीठ में थे, तो मैंने तुझसे इससे आसान चीज़ की माँग की थी कि मेरा साझी न बनाना, परंतु तूने साझी बनाकर ही दम लिया।”
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