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621 हदीसें

नबवी हदीसों का विश्वकोश

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अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब मस्जिद में प्रवेश करते, तो फ़रमाया करते :«أعوذ بالله العظيم، وبوجهه الكريم، وسلطانه القديم، من الشيطان الرَّجِيم» (मैं महान अल्लाह की, उसके सम्मानित चेहरे की और उसकी सनातन सत्ता की शरण माँगता हूँ, धिक्कारे हुए शैतान से।) पूछा गया : बस इतना ही ? मैंने कहा : हाँ। आपने फ़रमाया : जब (मस्जिद में प्रवेश करने वाला) व्यक्ति यह दुआ पढ़ता है तो शैतान कहता है : आज यह सारा दिन मुझसे सुक्षित हो गया।
ह़सन इसे अबू दावूद ने रिवायत किया है
एकि व्यक्ति अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आया और कहने लगा : ऐ अल्लाह के रसूल! हम में से एक व्यक्ति अपने दिल में ऐसी बातें पाता है (वह इशारे में बात कर रहा था) कि कोयला बन जाना उनको बोलने से अधिक प्रिय लगता है। यह सुन अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : अल्लाह सबसे बड़ा है। अल्लाह सबसे बड़ा है। सारी प्रशंसा अल्लाह की है, जिसने शैतान के फ़रेब को बुरे ख़याल की ओर फेर दिया।"
स़ह़ीह़ इसे अबू दावूद ने तथा नसई ने अल-कुबरा में रिवायत किया है
'जो अल्लाह चाहे एवं अमुक चाहे' ना कहो, बल्कि 'जो अल्लाह चाहे फिर अमुक चाहे' कहो।
सभी सनदों के आधार पर स़़ह़ीह़ इसे अबू दावूद ने तथा नसई ने अल-कुबरा में एवं अह़मद ने रिवायत किया है
"दया करने वालों पर दयावान अल्लाह दया करता है। तुम ज़मीन वालों पर दया करो, आकाश वाला तुमपर दया करेगा।"
स़ह़ीह़ इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी और अह़मद ने रिवायत किया है