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621 हदीसें

नबवी हदीसों का विश्वकोश

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"जो अल्लाह से इस अवस्था में मिलेगा कि किसी को उसका साझी न बनाया होगा, उसे कोई पाप हानि नहीं पहुँचाएगा, और जो उससे इस अवस्था में मिलेगा कि किसी को उसका साझी ठहराया होगा, तो कोई नेकी उसे लाभ नहीं पहुँचाएगी।"
स़ह़ीह़ इसे अह़मद ने रिवायत किया है
"अपशगुन लेना शिर्क है। अपशगुन लेना शिर्क है। अपशगुन लेना शिर्क है। -आपने यह बात तीन बार कही।- तथा हममें से हर व्यक्ति के दिल में इस तरह की बात आती है, लेकिन सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह उसे अपने ऊपर भरोसे के ज़रिए दूर कर देता है।
स़ह़ीह़ इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया है
"दया करने वालों पर दयावान अल्लाह दया करता है। तुम ज़मीन वालों पर दया करो, आकाश वाला तुमपर दया करेगा।"
स़ह़ीह़ इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी और अह़मद ने रिवायत किया है
"तुम्हारी ज़बान हमेशा अल्लाह के ज़िक्र से तर रहे।"
स़ह़ीह़ इसे तिर्मिज़ी, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया है
"अमल छह प्रकार के हैं और लोग चार प्रकार के हैं। रही बात छह आमाल की, तो उनमें से दो प्रकार के अमल वाजिब करने वाले हैं, दो प्रकार के अमल बराबर-बराबर हैं, एक प्रकार का अमल ऐसा नेक अमल है कि उसका सवाब दस गुना मिलता है और एक प्रकार का अमल ऐसा नेक अमल है कि उसका सवाब सात सौ गुना मिलता है। जहाँ तक दो वाजिब करने वाले अमल की बात है, तो जो व्यक्ति इस अवस्था में दुनिया से मृत्यु को प्राप्त हुआ कि किसी को अल्लाह का साझी नहीं ठहराया, वह जन्नत में जाएगा और जो इस अवस्था में दुनिया से मृत्यु पाया कि किसी को अल्लाह का साझी ठहराया, वह जहन्नम में जाएगा। जहाँ तक बराबर-बराबर वाले दो अमल की बात है, तो ध्यान में रहे कि जिसने किसी नेकी के काम की इस तरह नीयत कर ली कि उसके दिल ने उसे महसूस किया और अल्लाह ने उसकी नीयत को जाना, तो उसके लिए एक नेकी लिखी जाएगी। इसी तरह जिसने कोई बुरा काम किया, उसके लिए एक गुनाह लिखा जाएगा। पाँचवें प्रकार का अमल यह है कि जिसने कोई नेकी का काम कर लिया, उसे उस नेकी के काम का सवाब दस गुना दिया जाएगा। और छठे प्रकार का अमल यह है कि जिसने अल्लाह के रास्ते में कोई चीज़ खर्च की, उसे इस एक अच्छे काम का सवाब सात सौ गुना मिलेगा। जहाँ तक चार प्रकार के लोगों की बात है, तो कुछ लोग दुनिया में खुशहाल हैं और आख़िरत में कंगाल होंगे, कुछ लोग दुनिया में कंगाल हैं और आख़िरत में खुशहाल होंगे, कुछ लोग दुनिया में भी कंगाल हैं और आख़िरत में भी कंगाल होंगे, जबकि कुछ लोग दुनिया में भी खुशहाल हैं और आख़िरत में भी खुशहाल होंगे।
ह़सन इसे अह़मद ने रिवायत किया है
मैंने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! मुक्ति क्या है? आपने उत्तर दिया : "अपनी ज़बान पर नियंत्रण रखो, अपने घर के अंदर ही रहा करो और अपने गुनाहों पर रोया करो।"
स़ह़ीह़ इसे तिर्मिज़ी और अह़मद ने रिवायत किया है
हमें अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के उन सहाबा ने बताया, जो हमें पढ़ाया करते थे कि वे अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से दस आयतें पढ़ते और दूसरी दस आयतों को पढ़ना उस समय तक शुरू नहीं करते, जब तक उन दस आयतों के ज्ञान एवं अमल को सीख न लेते। सहाबा ने कहा : हमने ज्ञान और अमल दोनों सीखा।
ह़सन इसे अह़मद ने रिवायत किया है
"अगर तुम अल्लाह पर वैसा ही भरोसा करने लगो, जैसा भरोसा उसपर होना चाहिए, तो वह तुम्हें उसी तरह रोज़ी दे, जैसे चिड़ियों को रोज़ी देता है; वह सुबह को खाली पेट निकलती हैं और शाम को पेट भरकर लोटती हैं।"
स़ह़ीह़ इसे तिर्मिज़ी, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया है