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621 हदीसें

नबवी हदीसों का विश्वकोश

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हदीस का दर्जा

वह हर नमाज़ में तकबीर कहा करते थे। नमाज़ फ़र्ज़ हो कि नफ़ल। रमज़ान में हो कि दूसरे महीनों में। वह खड़े होते समय तकबीर कहते, फिर रुकू में जाते समय तकबीर कहते, फिर "سَمِعَ اللهُ لِمَنْ حَمِدَهُ" कहते, फिर सजदे में जाने से पहले "رَبَّنَا وَلَكَ الْحَمْدُ" कहते, फिर सजदे के लिए झुकते समय तकबीर कहते, फिर सजदे से सर उठाते समय तकबीर कहते, फिर सजदे में जाते समय तकबीर कहते, फिर सजदे से सर उठाते समय तकबीर कहते, फिर दो रकात पूरी होने के बाद की बैठक से खड़े होते समय तकबीर कहते और ऐसा नमाज़ पूरी होने तक हर रकात में करते। फिर नमाज़ पूरी करने के बाद कहते : उस हस्ती की क़सम, जिसके हाथ में मेरी जान है, मैं तुम्हारे बीच अल्लाह के रसूल से सबसे ज़्यादा मिलती-जुलती नमाज़ पढ़ने वाला व्यक्ति हूँ। दुनिया छोड़ने तक आप इसी तरह नमाज़ पढ़ते रहे।
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़ज्र की दो रकातों में {قُلْ يَا أَيُّهَا الْكَافِرُونَ} और {قُلْ هُوَ اللهُ أَحَدٌ} पढ़ी।
स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
"सबसे बुरा चोर वह है, जो अपनी नमाज़ में चोरी करता है।" किसी सहाबी ने पूछा कि नमाज़ में चोरी करने का क्या मतलब है? आपने उत्तर दिया : "रुकू एवं सजदा संपूर्ण रूप से न किया जाए।"
स़ह़ीह़ इसे इब्ने ह़िब्बान ने रिवायत किया है