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621 हदीसें

नबवी हदीसों का विश्वकोश

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हदीस का दर्जा

हम अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथ मक्का से मदीना लौट रहे थे। रास्ते में एक चश्मे तक पहुँचे, तो अस्र के समय कुछ लोगों ने बड़ी जल्दी दिखाई। जल्दी-जल्दी वज़ू कर लिया। हम पहुँचे, तो उनकी एड़ियाँ चमक रही थीं। उनको पानी ने छुआ तक नहीं था। यह देख अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "एड़ियों के लिए आग की यातना है। पूर्ण रूप से वज़ू किया करो।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
उसमान बिन अफ़्फ़ान रज़ियल्लाहु अनहु के आज़ाद किए हुए ग़ुलाम हुमरान से रिवायत है, उन्होंने देखा कि उसमान बिन अफ़्फ़ान रज़ियल्लाहु अनहु ने वज़ू का पानी मँगवाया, दोनों हाथों पर बर्तन से तीन बार पानी उंडेला, उनको तीन बार धोया, फिर वज़ू के पानी में दायाँ हाथ दाख़िल किया, फिर कुल्ली की, नाक में पानी चढ़ाया और नाक झाड़ा, फिर चेहरे को तीन बार और दोनों हाथों को तीन बार कोहनियों समेत धोया, फिर सर का मसह किया, फिर दोनों पैरों को तीन-तीन बार धोया और उसके बाद फ़रमाया : मैंने देखा कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने मेरे इस वज़ू की तरह वज़ू किया और उसके बाद फ़रमाया : "जिसने मेरे इस वज़ू की तरह वज़ू किया और उसके बाद दो रकात नमाज़ पढ़ी, जिसमें उसने अपने जी में कोई बात न की, अल्लाह उसके पिछले सारे गुनाह माफ़ कर देता है।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
“अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम एक साअ से पाँच मुद तक पानी से स्नान करते और एक मुद पानी से वज़ू करते थे।”
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
"जो अच्छी तरह वज़ू करता है, उसके जिस्म से पाप निकल जाते हैं, यहाँ तक कि नाख़ून के नीचे से भी निकल जाते हैं।"
स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
एक आदमी ने वज़ू किया और पैर में नाखून के बराबर जगह सूखी छोड़ दी। अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उसे देखा, तो फ़रमाया : “जाओ और अच्छी तरह वज़ू कर लो।” अतः, वह वापस गया और फिर उसने बाद में नमाज़ पढ़ी।
शवाहिद के आधार पर स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
मैंने अम्र बिन अबू हसन को देखा कि उन्होंने अब्दुल्लाह बिन ज़ैद रज़ियल्लाहु अनहु से अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के वज़ू के बारे में पूछा, तो उन्होंने एक बरतन पानी मँगवाया और उन्हें अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की तरह वज़ू करके दिखाया। चुनांचे सबसे पहले दोनों हथेलियों पर बरतन से पानी उंडेला और उन्हें तीन बार धोया। फिर बरतन में हाथ डालकर पानी लिया और कुल्ली की, नाक में पानी डाला और नाक झाड़ा। तीन चुल्लू पानी से तीन बार ऐसा किया। फिर बरतन में हाथ डालकर पानी लिया और तीन बार अपने चेहरे को धोया। फिर बरतन में हाथ डालकर पानी लिया और अपने दोनों हाथों को कोहनियों समेत दो बार धोया। फिर बरतन में हाथ डालकर पानी लिया और अपने सर का मसह किया; पहले दोनों हाथों को आगे से पीछे ले गए, फिर पीछे से आगे ले आए। ऐसा एक ही बार किया। फिर अपने दोनों पैरों को टखनों समेत धोया।
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
“जो मुसलमान अच्छी तरह वज़ू करता है, फिर खड़े होकर मन तथा तन के साथ दो रकात नमाज़ पढ़ता है, उसके लिए जन्नत अनिवार्य हो जाती है।” वह कहते हैं कि मैंने कहा : कितनी अच्छी बातें हैं। यह सुनकर एक व्यक्ति मेरे सामने से कहता है : इससे पहले की बातें इससे भी अच्छी थीं। मैंने देखा, तो वह उमर रज़ियल्लाहु अनहु थे। उन्होंने कहा : मैंने देखा है कि तुम अभी-अभी आए हो। आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने -इससे पहले- फ़रमाया था : “तुममें से जो भी सम्पूर्ण तरीक़े से वज़ू करता है और फिर कहता है : " أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللهُ وَأَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُ اللهِ وَرَسُولُهُ" (मैं इस बात की गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं और मुहम्मद अल्लाह के बंदे तथा रसूल हैं) उसके लिए जन्नत के आठों दरवाज़े खोल दिए जाएँगे। वह जिससे चाहेगा, प्रवेश करेगा।”
स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है