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621 हदीसें

नबवी हदीसों का विश्वकोश

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हदीस का दर्जा

एक यहूदी ने उनसे कहा : ऐ मोमिनों के अमीर! आपकी किताब (क़ुरआन) में एक ऐसी आयत है, जिसे आप पढ़ते रहते हैं, अगर वह आयत हम यहूदियों पर नाज़िल होती तो हम उस दिन को ईद का दिन ठहराते। उमर -रज़ियल्लाहु अन्हु- ने कहा : वह कौन-सी आयत है? यहूदी बोला यह आयत : “आज मैंने तुम्हारे लिए तुम्हारा दीन पूरा कर दिया और अपना एहसान भी तुम पर तमाम कर दिया और दीने इस्लाम को तुम्हारे लिए पसन्द किया।” उमर -रज़ियल्लाहु अन्हु- ने कहा कि हम उस दिन और उस स्थान को जानते हैं, जिसमें यह आयत रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर उतरी थी। यह आयत जुमा के दिन उतरी थी, जब आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अरफ़ा में खड़े थे ।
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब प्रत्येक रात बिस्तर में जाते, तो अपनी दोनों हथेलियों को जमा करते, फिर उनमें फूँकते और उनमें "क़ुल हु-वल्लाहु अहद", "क़ुल अऊज़ु बि-रब्बिल फ़लक़" और "क़ुल अऊज़ु बि-रब्बिन नास" तीनों सूरतें पढ़ते और दोनों हथेलियों को जहाँ तक संभव होता अपने शरीर पर फेरते। हाथ फेरने का आरंभ अपने सर, चेहरे और शरीर के अगले भाग से करते। ऐसा तीन बार करते।
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है
"जिसने सूरा बक़रा की अंतिम दो आयतें रात में पढ़ लीं, वह उसके लिए काफ़ी हो जाती हैं।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है