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621 हदीसें

नबवी हदीसों का विश्वकोश

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दो आदमियों ने मुझे बताया कि वे दोनों हज्जतुल वदा के अवसर पर उस समय नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास आए, जब आप सदक़ा बाँट रहे थे। चुनांचे उन दोनों ने उसमें से माँगा। इसपर आपने हमें ऊपर से नीचे तक देखा, तो हमें हट्टा-कट्टा पाया। फिर फ़रमाया : "यदि तुम दोनों चाहो, तो मैं तुम्हें दे देता हूँ, लेकिन इसमें किसी धनी और किसी कमाने वाले शक्तिशाली व्यक्ति का कोई हिस्सा नहीं है।"
स़ह़ीह़ इसे अबू दावूद तथा नसई ने रिवायत किया है
"अगली सफ़ को पूरा करो, फिर उसके बाद वाली को, और यदि (नमाज़ियों की संख्या कम होने के कारण) सफ़ में कोई कमी रह जाए, तो वह सबसे पिछली सफ़ में होनी चाहिए।"
स़ह़ीह़ इसे अबू दावूद तथा नसई ने रिवायत किया है
हे अल्लाह के रसूल! साद की माता मृत्यु को प्राप्त हो चुकी है। ऐसे में कौन-सा सदक़ा सर्वश्रेष्ठ है? फ़रमाया : "पानी।" कहते हैं कि उन्होंने एक कुआँ खुदवा दिया और कह दिया कि यह कुआँ साद की माता के लिए है।
सभी सनदों के आधार पर ह़सन इस ह़दीस़ को अबू दावूद, नसई और इब्न-ए-माजह ने रिवायत किया है
मैं अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास इस्लाम ग्रहण करने के लिए आया, तो आपने मुझे पानी तथा बेर के पत्तों से नहाने का आदेश दिया।
स़ह़ीह़ इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी और नसई ने रिवायत किया है
"जब पानी दो क़ुल्ला (दो बड़े-बड़े घड़ों के बराबर) हो जाए, तो वह गंदगी को प्रभावी होने नहीं देता।"
स़ह़ीह़ इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी, नसई, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया है
"जिसने प्रत्येक फर्ज़ नमाज़ के पश्चात आयतुल कुर्सी पढ़ी, उसको जन्नत में जाने से मौत के सिवा कोई चीज़ रोक नहीं सकती।"
स़ह़ीह़ इसे नसई ने अल-कुबरा में रिवायत किया है
"वह वचन, जो हमारे और उनके बीच है, नमाज़ है। जिसने इसे छोड़ दिया, उसने कुफ़्र किया।"
स़ह़ीह़ इसे तिर्मिज़ी, नसई, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया है
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने एक दिन हमें फ़ज्र की नमाज़ पढ़ाई, फिर पूछा : “क्या अमुक व्यक्ति उपस्थित है?” लोगों ने कहा : नहीं। आपने पुनः पूछा : “क्या अमुक व्यक्ति उपस्थित है?” लोगों ने कहा : नहीं। आपने फ़रमाया : “यह दो नमाज़ें मुनाफिकों के लिए सर्वाधिक कठिन हैं और यदि वह जान लेते कि इनमें कितना सवाब है, तो वे अवश्य आते, चाहे (हाथ एवं) घुटनों के बल घिसटते हुए ही क्यों न हो। प्रथम सफ (पंक्ति) फरिश्तों की सफ के समान है। यदि तुम इसकी फज़ीलत (महत्व) जान लेते, तो इसके लिए जल्दी करते। एक आदमी की नमाज़ दूसरे आदमी के साथ अकेले नमाज़ पढ़ने से बेहतर है और दो आदमियों के साथ नमाज़ पढ़ना एक आदमी के साथ नमाज़ पढ़ने से बेहतर है। लोग (नमाज़ में) जितने अधिक होंगे, नमाज़ अल्लाह तआला के समीप उतनी अधिक प्रिय होगी।”
स़ह़ीह़ इस ह़दीस़ को अबू दावूद, नसई और अह़मद ने रिवायत किया है