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621 हदीसें

नबवी हदीसों का विश्वकोश

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मैं मोज़ों पर मसह के विषय में पूछने के लिए सफ़वान बिन अस्साल मुरादी के पास गया। उन्होंने आने का कारण जानना चाहा तो मैंने बताया कि ज्ञान प्राप्त करने के लिए आया हूँ। इसपर वह बोले : ज्ञान प्राप्त करने वाले से प्रसन्न होकर फ़रिश्ते उसके सम्मान में अपने पंख बिछा देते हैं। मैंने कहा : मेरे दिल में पेशाब और पाखाने के बाद मोज़ों पर मसह के बारे में संदेह पैदा हो गया है। चूँकि आप नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के सहाबा में से हैं, इसलिए आपके पास यह पूछने के लिए आया हूँ कि क्या आपने इस बारे में नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को कुछ कहते हुए सुना है? कहा : हाँ, आप हमें आदेश देते कि जब हम सफ़र में हों तो तीन दिन और तीन रात पेशाब, पाखाना और नींद के बाद अपने मोज़े न उतारें, मगर जनाबत की बात दूसरी है। मैंने कहा कि क्या आपने नबी को प्रेम के बारे में कुछ कहते सुना है? कहा : हाँ, हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथ एक सफ़र में थे। हम आपके पास ही थे कि एक देहाती ने ऊँची आवाज़ में आपसे कहा कि 'ऐ मुहम्मद!' अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने भी उसे उसी जैसी आवाज़ में उत्तर दिया कि 'हाँ, बोलो।' हमने उससे कहा : तेरा बुरा हो, ज़रा धीमी आवाज़ में बात कर ले, तू नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास है और तुझे इससे मना किया गया है। उस देहाती ने कहा : अल्लाह की क़सम! मैं धीमी आवाज़ में बात नहीं करूँगा। देहाती ने कहा : आदमी कुछ लोगों से प्रेम करता है और (कर्म के मामले में) उनके निकट पहुँच नहीं पाता? तो नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कहा : आदमी क़यामत के दिन उसी के साथ होगा, जिससे प्रेम करता है। इस तरह, वह हमें हदीस सुनाते गए, यहाँ तक कि उन्होंने पश्चिम की ओर स्थित एक द्वार का ज़िक्र किया, जिसकी चौड़ाई इतनी है कि एक सवार उसकी चौड़ाई में चालीस या सत्तर साल चलता रहे।
स़ह़ीह़ इसे तिर्मिज़ी, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया है
एक व्यक्ति ने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! हम समुद्री यात्रा पर निकलते हैं और हमारे साथ थोड़ा-सा पानी होता है। उससे वज़ू कर लें, तो प्यासे रह जाएँगे। ऐसे मे क्या हम समुद्र के पानी से वज़ू कर लिया करें? अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उत्तर दिया : "समुद्र का पानी स्वयं पाक है एवं दूसरों को पाक करने वाला है और उसका मरा हुआ जानवर हलाल है।"
स़ह़ीह़ इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी, नसई, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया है
"जिसने ज़ुहर से पहले और ज़ुहर के बाद चार-चार रकातें पाबंदी से पढ़ीं, अल्लाह उसपर जहन्नम की आग हराम कर देगा।"
स़ह़ीह़ इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी, नसई, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया है
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम दो सजदों के बीच में यह दुआ पढ़ते थे : "ऐ अल्लाह! तू मुझे माफ कर दे, मेरे ऊपर रहम कर, मुझे आफियत (स्वास्थ्य इत्यादि) दे तथा मुझे रोज़ी प्रदान कर।"
शवाहिद के आधार पर ह़सन इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया है