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621 हदीसें

नबवी हदीसों का विश्वकोश

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हदीस का दर्जा

"यदि मुसलमानों पर -या : मेरी उम्मत पर- कठिन न होता, तो मैं उन्हें आदेश देता कि प्रत्येक नमाज़ के समय मिसवाक कर लिया करें।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
"बेशक मुझे लानत करने वाला बनाकर नहीं भेजा गया, बल्कि मुझे दया बनाकर भेजा गया है।"
स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर चालीस साल की उम्र में वह्य उतरी। फिर आप तेरह साल तक मक्का में रहे। उसके बाद आपको हिजरत (पलायन) का आदेश हुआ तो आपने मदीना की तरफ हिजरत (पलायन) किया और आप वहाँ दस बरस रहे। इसके बाद आपने मृत्यु पाई।
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
(नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम फ़रमाते हैं कि) "मैं चल रहा था कि मैंने आसमान से एक आवाज़ सुनी। सर उठाया तो देखा कि वही फ़रिश्ता जो मेरे पास हिरा में आया था आसमान और ज़मीन के बीच एक कुर्सी पर बैठा हुआ है। मैं उसे देखकर डर गया। फिर (घर) वापस आ गया और कहा : मुझे चादर ओढ़ा दो। उस समय महान अल्लाह ने यह वह़्य उतारी : {ऐ चादर ओढ़ने वाले! उठो, सावधान करो, अपने रब की बड़ाई का ऐलान करो, अपने कपड़े पाक रखो और मलिनता को त्याग दो।} [सूरा मुद्दस्सिर : 2-5] फिर वह़्य के उतरने में तेज़ी आ गई और वह़्य लगातार उतरने लगी।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब फ़ज्र की नमाज़ पढ़ लेते, तो अपनी नमाज़ की जगह पर बैठे रहते, यहाँ तक कि सूरज अच्छी तरह निकल आता, और (वर्णनकर्ता ने) कहा : आप अपनी उस जगह से जहाँ सुबह की नमाज़ पढ़ते थे, सूरज निकलने तक नहीं उठते थे। जब सूरज निकल आता, तो उठ जाते। सहाबा बात करते हुए अज्ञानता काल की बातों को छेड़ देते और हँसते तो आप मुस्कुरा देते।
स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
"ऐ अल्लाह! मैं तो बस एक मनुष्य हूँ। अतः, जिस किसी मुसलमान को मैंने बुरा-भला कहा हो, उसपर लानत भेजी हो या उसे कोड़े मारे हों, तो तू इसे उसके लिए शुद्धि और दया बना दे।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
ऐ मोमिनों की माता! आप मुझे अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के चरित्र के बारे में बताइए। यह सुन उन्होंने पूछा : क्या तुम क़ुरआन नहीं पढ़ते? उनका कहना है कि मैंने उत्तर दिया : पढ़ता तो अवश्य हूँ। उत्तर सुनने के बाद आइशा रज़ियल्लाहु अनहा ने कहा : अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का चरित्र क़ुरआन था।
स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने एक लंबी हदीस के अंतर्गत रिवायत किया है
जब से रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम मदीना तशरीफ लाए, आपके घर वालों ने तीन दिन तक लगातार कभी गेहूँ की रोटी पेट भरकर नहीं खाई। यहां तक कि आप दुनिया से चले गए।
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है