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621 हदीसें

नबवी हदीसों का विश्वकोश

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हदीस का दर्जा

ऐ अल्लाह के रसूल! अगर हमारे शासक ऐसे लोग बन जाएँ, जो अपना हक़ तो हमसे वसूल करें, लेकिन हमारा हक़ हमें न दें, तो आप इस विषय में हमें क्या निर्देश देते हैं? आपने उनकी बात पर ध्यान हीं दिया। उन्होंने दोबारा सवाल किया, आपने इस बार भी ध्यान नहीं दिया। उन्होंने फिर दूसरी या तीसरी बात सवाल किया, तो अशअस बिन क़ैस रज़ियल्लाहु अनहु ने उनको खींच लिया। अब आपने फ़रमाया : "सुनो और अनुसरण करो। उनपर उस बात की ज़िम्मेवारी है, जो उनके ऊपर डाली गई है और तुमपर उस बात की ज़िम्मेवारी है, जो तुमपर डाली गई है।"
स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
एक दिन अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हमारे बीच खड़े हुए और ऐसा प्रभावशाली वक्तव्य रखा कि हमारे दिल दहल गए और आँखें बह पड़ीं। अतः किसी ने कहा कि ऐ अल्लाह के रसूल! आपने हमें एक विदाई के समय संबोधन करने वाले की तरह संबोधित किया है। अतः आप हमें कुछ वसीयत करें। तब आपने कहा : "तुम अल्लाह से डरते रहना और अपने शासकों के आदेश सुनना तथा मानना। चाहे शासक एक हबशी ग़ुलाम ही क्यों न हो। तुम मेरे बाद बहुत ज़्यादा मतभेद देखोगे। अतः तुम मेरी सुन्नत तथा नेक और सत्य के मार्ग पर चलने वाले ख़लीफ़ागण की सुन्नत पर चलते रहना। इसे दाढ़ों से पकड़े रहना। साथ ही तुम दीन के नाम पर सामने आने वाली नई-नई चीज़ों से भी बचे रहना। क्योंकि हर बिदअत (दीन के नाम पर सामने आने वाली नई चीज़) गुमराही है।
स़ह़ीह़ इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया है
"मैं तुम्हें अल्लाह से डरने तथा (अपने शासनकर्ता की) बात सुनने और मानने की वसीयत करता हूँ, चाहे तुम्हारा शासक एक दास ही क्यों न हो। क्योंकि तुममें से जो जीवित रहेगा, वह बहुत सारा मतभेद और टकराव देखेगा। उस समय तुम मेरी सुन्नत और सत्य के मार्ग पर चलने वाले ख़लीफ़ागण की सुन्नत को सीने से लगाए रहना और मज़बूती से थामे रहना। तथा धर्म के नाम पर प्रचलन में आने वाली नई-नई चीज़ों (बिद्दतों) से बचते रहना, क्योंकि हर बिद्दत गुमराही है।"
स़ह़ीह़ इस ह़दीस़ को अबू दावूद और तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है
"धर्म, शुभचिंतन का नाम है।" हमने कहा : किसका? तो फ़रमाया : "अल्लाह, उसकी किताब, उसके रसूल, मुसलमानों के मार्गदर्शकों और आम लोगों का।"
स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है