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621 हदीसें

नबवी हदीसों का विश्वकोश

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हदीस का दर्जा

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अक्सर यह दुआ पढ़ा करते थे : "يَا مُقَلِّبَ القُلُوبِ ثَبِّتْ قَلْبِي عَلَى دِينِكَ" (ऐ दिलों को पलटने वाले, मेरे दिल को अपने दीन पर जमाए रख।) मैंने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल, हम आपपर और आपके लाए हुए दीन पर ईमान ले आए हैं। फिर भी क्या आपको हमारे बारे में डर है? आपने कहा : "हाँ, निःसंदेह दिल अल्लाह की उंगलियों में से दो उंगलियों के बीच में हैं। अल्लाह जैसे चाहता है, उनको पलटता है।"
स़ह़ीह़ इसे तिर्मिज़ी और अह़मद ने रिवायत किया है
मैंने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल, मुझे कोई ऐसी वस्तु सिखाइए, जो मैं सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह से माँगूँ। आपने फ़रमाया : "अल्लाह से आफ़ियत (सलामती) माँगिए।" जब कुछ दिन बीत गए, तो फिर मैं पहुँचा और कहा : ऐ अल्लाह के रसूल, कोई ऐसी वस्तु सिखाइए, जो मैं अल्लाह से माँगूँ। तो फ़रमाया : "ऐ अब्बास, ऐ अल्लाह के रसूल के चचा, अल्लाह से दुनिया एवं आख़िरत में आफ़ियत (सलामती) माँगिए।"
स़ह़ीह़ लि-ग़ैरिही (अन्य सनदों अथवा रिवायतों से मिलकर स़ह़ीह़) इसे तिर्मिज़ी और अह़मद ने रिवायत किया है