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621 हदीसें

नबवी हदीसों का विश्वकोश

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"जिसने हमारे इस धर्म में कोई ऐसी चीज़ पैदा की, जो धर्म का भाग नहीं है, तो वह अमान्य एवं अस्वीकृत है।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
"मोमिन को क़यामत के दिन उसके सर्वशक्तिमान पालनहार के सामने लाया जाएगा, यहाँ तक कि उसपर अपनी ओर से पर्दा डाल देगा और उससे उसके गुनाहों का इक़रार कराते हुए पूछेगा : क्या तुम इस गुनाह को जान रहे हो? क्या तुम (इस गुनाह को) जान रहे हो? वह कहेगा : ऐ मेरे पालनहार! मैं जान रहा हूँ। चुनांचे अल्लाह फ़रमाएगा कि मैंने दुनिया में तुम्हारे इस गुनाह पर पर्दा डाल रखा था और आज मैं उसे तुम्हारे लिए माफ़ करता हूँ। फिर उसे उसकी नेकियों का रजिस्टर दिया जाएगा। रही बात अविश्वासियों एवं मुनाफ़िक़ों की, तो उनके बारे में सारी सृष्टि के सामने इस बात की घोषणा कर दी जाएगी कि इन लोगों ने अल्लाह पर झूठ बाँधा था।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
वह अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास आए और कहने लगे : ऐ अल्लाह के रसूल! शैतान मेरे, मेरी नमाज़ तथा मेरी तिलावत के बीच रुकावट बनकर खड़ा हो जाता है। मुझे उलझाने के प्रयास करता है। यह सुन अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "यह एक शैतान है, जिसे ख़िंज़िब कहा जाता है। जब तुम्हें उसके व्यवधान डालने का आभास हो, तो उससे अल्लाह की शरण माँगो और तीन बार अपने बाएँ ओर थुत्कारो।" उनका कहना है कि मैंने इसपर अमल करना शुरू किया, तो अल्लाह ने मेरी इस परेशानी को दूर कर दिया।
स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
एक व्यक्ति अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास आया और पूछा कि ऐ अल्लाह के रसूल! दो वाजिब करने वाली चीज़ें क्या हैं? आपने उत्तर दिया : "जो इस हाल में मरा कि किसी को अल्लाह का साझी नहीं बनाया, वह जन्नत में प्रवेश करेगा और जो इस हाल में मरा कि किसी को अल्लाह का साझी बनाता रहा, वह जहन्नम में जाएगा।"
स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
"जिसने किसी हिदायत की ओर बुलाया, उसे भी उतना सवाब मिलेगा, जितना उसका अनुसरण करने वालों को मिलेगा। लेकिन इससे उन लोगों के सवाब में कोई कमी नहीं होगी। तथा जिसने गुमराही की ओर बुलाया, उसे भी उतना गुनाह होगा, जितना गुनाह उसका अनुरण करने वालों को हागा। परन्तु इससे उन लोगों के गुनाह में कोई कमी नहीं होगी।"
स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
"अतिशयोक्ति करने वाले हलाक हो गए।" आपने यह बात तीन बार कही।
स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
"अल्लाह किसी मोमिन के द्वारा किए गए किसी अच्छे काम के महत्व को घटाता नहीं है। मोमिन को उसके अच्छे काम के बदले में दुनिया में नेमतें प्रदान की जाती हैं और आख़िरत में प्रतिफल दिया जाता है। जबकि काफ़िर को उसके द्वारा अल्लाह के लिए किए गए अच्छे कामों के बदले में दुनिया में आजीविका प्रदान कर दी जाती है, यहाँ तक कि जब वह आख़िरत की ओर प्रस्थान करता है, उसके पास कोई अच्छा काम नहीं होता, जिसका उसे बदला दिया जाए।"
स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
"हम नौ, आठ या सात लोग अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास थे कि इसी बीच आपने कहा : "क्या तुम अल्लाह के रसूल से बैअत (अर्थात; निष्ठा की प्रतिज्ञा) नहीं करोगे?" चूँकि हमने कुछ दिन पहले ही आपसे बैअत की थी, इसलिए उत्तर दिया : ऐ अल्लाह के रसूल, हम तो आपसे बैअत कर चुके हैं। आपने फिर कहा : "क्या तुम अल्लाह के रसूल से बैअत नहीं करोगे?" हमने उत्तर दिया : ऐ अल्लाह के रसूल, हम तो आपसे बैअत कर चुके हैं। लेकिन, आपने फिर कहा : "क्या तुम अल्लाह के रसूल से बैअत नहीं करोगे?" अतः, हमने हाथ फैला दिए और कहा : हमने आपसे बैअत कर ली, लेकिन किस बात पर बैअत करें? फ़रमाया : "इस बात पर कि केवल अल्लाह की इबादत करोगे, किसी को उसका साझी नहीं बनाओगे, पाँच वक्त की नमाज़ें पढ़ोगे और अल्लाह का अनुसरण करोगे। -तथा धीरे से एक बात कही- और लोगों से कुछ नहीं माँगोगे।" चुनांचे मैंने उनमें से कुछ लोगों को देखा कि उनका कोड़ा गिर जाता तो किसी से उठाकर देने तक नहीं कहते थे।
स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है