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621 हदीसें

नबवी हदीसों का विश्वकोश

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"जो लोग किसी सभा से अल्लाह का ज़िक्र किए बिना उठ जाते हैं, वे वैसे हैं जैसे मरे हुए गधे के पास से उठते हैं, और यह उनके लिए पछतावे का कारण बनेगा।"
स़ह़ीह़ इसे अबू दावूद ने रिवायत किया है
जब मुअज़्ज़िन "اللهُ أَكْبَرُ اللهُ أَكْبَرُ" (अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर) कहता है और (उसके उत्तर में) तुममें से कोई "اللهُ أَكْبَرُ اللهُ أَكْبَرُ" (अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर) कहता है, फिर मुअज़्ज़िन "أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللهُ" (अश्हदु अल-लाइलाहा इल्लल्लाह) कहता है और वह "أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللهُ" (अश्हदु अल-लाइलाहा इल्लल्लाह) कहता है, फिर मुअज़्ज़िन "أَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا رَسُولُ اللهِ" (अश्हदु अन्ना मुहम्मदर-रसूलुल्लाह) कहता है और वह "أَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا رَسُولُ اللهِ" (अश्हदु अन्ना मुहम्मदर-रसूलुल्लाह) कहता है, फिर मुअज़्ज़िन "حَيَّ عَلَى الصَّلَاةِ" (हैय्या अलस्स्लाह) कहता है और वह "لَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللهِ" (ला हौला वला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह) कहता है, फिर मुअज़्ज़िन "حَيَّ عَلَى الْفَلَاحِ" (हैय्या अलल -फलाह) कहता है और वह "لَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللهِ" (ला हौला वला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह) कहता है, फिर मुअज़्ज़िन "اللهُ أَكْبَرُ اللهُ أَكْبَرُ" (अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर) कहता है और वह "اللهُ أَكْبَرُ اللهُ أَكْبَرُ" (अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर) कहता है, फिर मुअज़्ज़िन "لَا إِلَهَ إِلَّا اللهُ" (लाइलाहा इल्लल्लाह) कहता है और वह सच्चे दिल से "لَا إِلَهَ إِلَّا اللهُ" (लाइलाहा इल्लल्लाह) कहता है, तो वह जन्नत में दाख़िल हो जाता है।
स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कुछ सहाबा ने नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से कहा : हे अल्लाह के रसूल, धनवान लोग सवाब (पुण्य) ले गए; वे हमारी तरह नमाज़ पढ़ते हैं, हमारी तरह रोज़ा रखते हैं, और अपनी अतिरिक्त संपत्ति से सदक़ा (दान) करते हैं। नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया : ‎“‎क्या अल्लाह ने तुम्हारे लिए वह चीज़ें नहीं बनाई हैं, जिनसे तुम सदक़ा कर सकते हो? हर तस्बीह (सुब्हानल्लाह कहना) सदक़ा है, हर तकबीर (अल्लाहु अकबर कहना) सदक़ा है, हर तहमीद (अल्ह़म्दु लिल्लाह कहना) सदक़ा है, हर तहलील (ला इलाहा इल्लल्लाह कहना) सदक़ा है, भलाई का आदेश देना सदक़ा है, बुराई से रोकना सदक़ा है, और तुम्हारे किसी के साथ वैवाहिक संबंध बनाना भी सदक़ा है।‎”‎ सहाबा ने पूछा : हे अल्लाह के रसूल, क्या हम अपनी कामवासना पूरी करते हैं तो उसमें भी सवाब (पुण्य) मिलता है? नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कहा : “तुम्हारा क्या विचार है यदि वह इस कामवासना को हराम (अवैध) रूप से पूरी करता है, तो क्या उसे इस पर गुनाह नहीं होता? तो इसी तरह, जब वह इस कामवासना को हलाल (वैध) रूप से पूरी करताता है, तो उसे उस पर पुण्य मिलता है।"
स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
"जब तुम मुअज़्ज़िन को अज़ान देते हुए सुनो, तो उसी तरह के शब्द कहो, जो मुअज़्ज़िन कहता है। फिर मुझपर दरूद भेजो। क्योंकि जिसने मुझपर एक बार दरूद भेजा, अल्लाह फ़रिश्तों के सामने दस बार उसकी तारीफ़ करेगा। फिर मेरे लिए वसीला माँगो। दरअसल वसीला जन्नत का एक स्थान है, जो अल्लाह के बंदों में से केवल एक बंदे को शोभा देगा और मुझे आशा है कि वह बंदा मैं ही रहूँगा। अतः जिसने मेरे लिए वसीला माँगा, उसे मेरी सिफ़ारिश प्राप्त होगी।"
स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
“जिसने दस बार 'ला इलाहा इल्लल्लाहु वह़दहु ला शरीका लहु, लहुल-मुल्कु व लहुल-हम्दु, व हुवा अला कुल्लि शैइन क़दीर' (अर्थात, अल्लाह के सिवा कोई वास्तविक पूज्य नहीं, वह अकेला है, उसका कोई साझी नहीं है, पूरा राज्य उसी का है और सब प्रशंसा उसी की है और उसके पास हर चीज़ का सामर्थ्य है।) कहा, वह उस व्यक्ति के समान है, जिसने इसमाईल (अलैहिस्सलाम) की संतान में से चार दासों को मुक्त किया।”
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम मक्का के रास्ते में चल रहे थे कि जुमदान नामी एक पर्वत के पास से गुज़रे। अतः फ़रमाया : "चलते रहो, यह जुमदान है। अतुल्य विशेषता वाले लोग आगे हो गए।" सहाबा ने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! यह अतुल्य विशेषता वाले लोग कौन हैं? फ़रमाया : "अल्लाह को बहुत ज़्यादा याद करने वाले पुरुष और अल्लाह को बहुत-ज़्यादा याद करने वाली स्त्रियाँ।"
स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है