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621 हदीसें

नबवी हदीसों का विश्वकोश

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हदीस का दर्जा

“नेकी उत्तम आचरण है, तथा गुनाह वह है जो तुम्हारे हृदय में खटकता रहे और तुम यह नापसंद करो कि लोग उसे जानें।”
स़ह़ीह़ पहली ह़दीस़ मुस्लिम ने और दूसरी ह़दीस़ अह़मद तथा दारिमी ने रिवायत की है
“चार बातें ऐसी हैं कि जिस व्यक्ति के अंदर यह बातें होंगी, वह मुनाफ़िक़ होगा तथा यदि उसके अंदर उनमें से कोई एक बात होगी, तो उसके अंदर निफ़ाक़ की एक विशेषता होगी, यहाँ तक कि उसे छोड़ दे; जब बात करे तो झूठ बोले, जब वादा करे तो तोड़ दे, जब किसी से झगड़ा करे तो गाली बके और जब वचन दे तो धोखा दे।”
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
एक दिन अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- मिंबर पर बैठे और हम भी आपके आस-पास बैठ गए। इस बीच आपने फ़रमाया : "मैं अपने बाद तुम्हारे बारे में जिन चीज़ों से डरता हूँ, उनमें से एक दुनिया की चमक-दमक और उसकी माया के दरवाज़ों का खुलना है।" यह सुन एक व्यक्ति ने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! क्या भलाई भी बुराई लाती है? यह सुन कर अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ख़ामोश हो गए। यह देख उनसे कहा गया : क्या बात है कि तुम अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से बात कर रहे हो और वह तुमसे बात नहीं कर रहे हैं? इस बीच हमने देखा कि आपपर वह्य उतर रही है। फिर आपने पेशानी से पसीना पोंछा और उसके बाद फ़रमाया : "प्रश्न करने वाला कहाँ है?" एक तरह से आपने उसकी प्रशंसा की और उसके बाद फ़रमाया : "भलाई बुराई नहीं लाती। दरअसल जो घास मौसम-ए-बहार में पैदा होती है, वह जान ले लेती है या विनाश के निकट पहुँचा देती है। अलबत्ता, उस जानवर का नुक़सान नहीं होता, जो घास खाता है और जब उसकी दोनों कोख भर जाती है, तो सूरज की ओर मुँह करके जुगाली करना शुरू कर देता है, फिर लीद और पेशाब करता है और उसके बाद दोबारा खाता है। निस्संदेह यह धन हरा-भरा और मीठा है। एक मुसलमान के लिए वह धन बहुत अच्छा है, जो उसने निर्धन, यतीम और यात्री को दिया। (या फिर इसी तरह की कोई बात अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने कही।) लेकिन जिसने उसे अवैध रूप से लिया, वह उस व्यक्ति की तरह है, जो खाता तो है, लेकिन उसका पेट नहीं भरता। इस तरह का धन क़यामत के दिन इन्सान के विरुद्ध गवाही देगा।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम दो क़ब्रों के पास से गुज़रे, तो फ़रमाया : "इन दोनों को यातना दी जा रही है, और वह भी यातना किसी बड़े पाप के कारण नहीं दी जा रही है। दोनों में से एक पेशाब से नहीं बचता था, और दूसरा लगाई- बुझाई करता फिरता था।" फिर आपने एक ताज़ा शाखा ली, उसे आधा-आधा फाड़ा और हर एक क़ब्र में एक-एक भाग को गाड़ दिया। सहाबा ने पूछा कि ऐ अल्लाह के रसूल! आपने ऐसा क्यों किया? तो आपने जवाब दिया : "शायद इन दोनों की यातना को उस समय तक के लिए हल्का कर दिया जाए, जब तक यह दोनों शाखाएँ सूख न जाएँ।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
"ऐ औरतो! तुम सदक़ा किया करो, क्योंकि मैंने जहन्नम के अंदर तुम्हारी संख्या अधिक देखी है।" औरतों ने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! ऐसा क्यों है? आपने उत्तर दिया : "तुम लानत अधिक करती हो और पति की नाशुक्री करती हो। मैंने विवेक एवं दीन में अधूरी होने के बावजूद तुम (औरतों) से ज़्यादा किसी को भी एक विवेकशील व्यक्ति के विवेक को भ्रमित कर देने वाला नहीं देखा।" औरतों ने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! हमारे दीन और हमारे विवेक की कमी क्या है? आपने उत्तर दिया : "क्या औरत की गवाही मर्द की आधी गवाही के बराबर नहीं है?" उन्होंने कहा : जी है। आपने कहा : "यही उसके विवेक की कमी को दर्शाता है। क्या ऐसा नहीं है कि जब औरत माहवारी की अवस्था में होती है, तो न नमाज़ पढ़ सकती है, न रोज़ा रख सकती है?" औरतों ने कहा : जी, ऐसा तो है। आपने फ़रमाया : "यही उसके दीन की कमी को दर्शाता है।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने यह आयत पढ़ी : "(ऐ नबी!) वही है जिसने आप पर यह पुस्तक उतारी, जिसमें से कुछ आयतें मुहकम हैं, वही पुस्तक का मूल हैं, तथा कुछ दूसरी (आयतें) मुतशाबेह हैं। फिर जिनके दिलों में टेढ़ है, तो वे फ़ितने की तलाश में तथा उसके असल आशय की तलाश के उद्देश्य से, सदृश अर्थों वाली आयतों का अनुसरण करते हैं। हालाँकि उनका वास्तविक अर्थ अल्लाह के सिवा कोई नहीं जानता। तथा जो लोग ज्ञान में पक्के हैं, वे कहते हैं हम उसपर ईमान लाए, सब हमारे रब की ओर से है। और शिक्षा वही लोग ग्रहण करते हैं, जो बुद्धि वाले हैं।" [सूरा आल-ए-इमरान : 7] उनका कहना है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जब तुम ऐसे लोगों को देखो, जो क़ुरआन की सदृश आयतों का अनुसरण करते हों, तो जान लो कि उन्हीं का नाम अल्लाह ने लिया है। अतः उनसे सावधान रहना।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
"क़यामत के दिन जहन्नमियों में से सबसे कम अज़ाब उस व्यक्ति को हो रहा होगा, जिसके पास आग की दो पट्टियाँ और आग ही के दो जूते होंगे, जिनके कारण उसका मस्तिष्क खौल रहा होगा। वह समझेगा कि उससे ज़्यादा सख़्त अज़ाब किसी को नहीं हो रहा है। हालाँकि उसे सबसे हल्का अज़ाब दिया जा रहा होगा।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
"क़यामत उस समय तक क़ायम नहीं होगी, जब तक इस तरह की हालत पैदा न हो जाए कि एक व्यक्ति किसी की क़ब्र के पास से गुज़रे और कहे कि काश! इसके स्थान पर मैं होता!"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है