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621 हदीसें

नबवी हदीसों का विश्वकोश

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रावी

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"कुछ लोग अल्लाह के धन को नाहक़ ख़र्च करते हैं। उन्हीं लोगों के लिए क़यामत के दिन जहन्नम है।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है
"अज़ान तथा इक़ामत के बीच की जाने वाली दुआ रद्द नहीं होती।"
स़ह़ीह़ इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी और नसई ने रिवायत किया है
"ऐ अल्लाह! मैं तेरी नेमत के छिन के जाने, (विपत्ति में) तेरी प्रदान की हुई सुरक्षा के बदल जाने, तेरी अचानक आपदा तथा तेरे हर प्रकार के क्रोध से तेरी शरण चाहता हूँ।"
स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
“सारे कार्यों के प्रतिफल का आधार नीयतों पर है और प्रत्येक व्यक्ति को उसकी नीयत के अनुरूप ही परिणाम मिलेगा। अतः, जिसने अल्लाह और उसके रसूल के लिए हिजरत की, उसकी हिजरत अल्लाह और उसके रसूल के लिए है और जिसने दुनिया प्राप्त करने या किसी स्त्री से शादी रचाने के लिए हिजरत की, उसे वही मिलेगा जिसके लिए उसने हिजरत की।”
स़ह़ीह़ इसे इमाम अबू अब्दुल्लाह मुह़म्मद बिन इस्माईल बिन इब्राहीम बिन मुग़ीरा बिन बर्दिज़्बह अल-बुखारी (रहमतुल्लाह अलैह) एवं इमाम अबुल हु़सैन मुस्लिम बिन अल-ह़ज्जाज बिन मुस्लिम अल-कु़शैरी नीशापूरी (रहमतुल्लाह अलैह) ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तकों, स़ह़ीह़ बुखारी तथा स़ह़ीह़ मुस्लिम में रिवायत किया है, जो इस्लामी पुस्तकों में सबसे प्रामाणिक मानी जाती हैं
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम सर्वाधिक जो दुआ करते थे वह यह है : “हे अल्लाह, हमारे रब, हमें दुनिया में भी अच्छी दशा प्रदान कर और आख़िरत में भी अच्छी दशा प्रदान कर और हमें जहन्नम की यातना से बचा ले।”
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
"उस व्यक्ति की मिसाल जो अपने रब को याद करता है और उसकी मिसाल जो अपने रब को याद नहीं करता, जीवित और मृत की सी है।" सही मुस्लिम के शब्द हैं : "उस घर की मिसाल जिसमें अल्लाह को याद किया जाता है और उस घर की मिसाल जिसमें अल्लाह को याद नहीं किया जाता, जीवित और मृत जैसी है।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
"तुममें से हर व्यक्ति की मृत्यु इस अवस्था में आनी चाहिए कि वह अल्लाह से अच्छा गुमान रखता हो।"
स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
"जिसने खाना खाने के बाद यह दुआ पढ़ीः 'الحمدُ للهِ الذي أَطْعَمَنِي هَذَا، وَرَزَقْنِيهِ مِنْ غَيرِ حَوْلٍ مِنِّي وَلَا قُوَّةٍ' (अर्थात - सारी प्रशंसा अल्लाह की है, जिसने मुझे यह खाना खिलाया तथा यह रोज़ी दी, जबकि इसमें मेरी शक्ति तथा सामर्थ्य का कोई दख़ल नहीं है) उसके पिछले सारे गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं।"
ह़सन इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया है