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621 हदीसें

नबवी हदीसों का विश्वकोश

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"कोई भी बंदा जब कोई गुनाह करता है, फिर खड़े होकर पवित्रता अरजन करता है, फिर नमाज़ पढ़ता है, फिर अल्लाह से क्षमा याचना करता है, तो अल्लाह उसे क्षमा कर देता है।" फिर आपने यह आयत पढ़ी : {وَالَّذِينَ إِذَا فَعَلُوا فَاحِشَةً أَوْ ظَلَمُوا أَنْفُسَهُمْ ذَكَرُوا اللهَ فَاسْتَغْفَرُوا لِذُنُوبِهِمْ} "और जब कभी वे कोई बड़ा पाप कर जाएँ अथवा अपने ऊपर अत्याचार कर लें, तो अल्लाह को याद करते हैं, फिर अपने पापों के लिए क्षमा माँगते हैं।" [सूरा आल-ए-इमरान: 135]
स़ह़ीह़ इसे अबू दावूद ने, तिर्मिज़ी ने तथा नसई ने अल-कुबरा में इसी प्रकार इब्न-ए-माजह ने और अह़मद ने रिवायत किया है
‎“‎किसी आदमी ने अपने पेट से बुरा बर्तन कोई नहीं भरा। आदम की संतान के लिए खाने के कुछेक लुक़मे काफ़ी हैं, जो उसकी पीठ खड़ी रखें। अगर अधिक खाना ज़रूरी हो तो पेट का एक तिहाई भाग खाने के लिए, एक तिहाई भाग पीने के लिए और एक तिहाई भाग सांस लेने के लिए हो।‎”‎
स़ह़ीह़ इसे इमाम अह़मद, तिर्मिज़ी, नसई और इब्न-ए-माजह ने रिवायत किया है
अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- जब सुबह करते, तो यह दुआ पढ़ते : "ऐ अल्लाह! हमने तेरे (अनुग्रह के) साथ सुबह की और तेरे ही (अनुग्रह के) साथ शाम की और हम तेरे ही (नाम) से जीते हैं और तेरे ही (नाम) से मरते हैं, और हमें तेरी ही ओर उठकर जाना है।" और जब शाम करते, तो यह दुआ पढ़ते : “ऐ अल्लाह! हमने तेरे (अनुग्रह के) साथ शाम की और तेरे ही (अनुग्रह के) साथ सुबह की और हम तेरे ही (नाम) से जीते हैं और तेरे ही (नाम) से मरते हैं, और हमें तेरी ही ओर उठकर जाना है। फ़रमाया : और दूसरी बार (कहा:) "तेरी ही ओर लौटकर जाना है।”
ह़सन इसे अबू दावूद ने, तिर्मिज़ी ने तथा नसई ने अल-सुनन अल-कुबरा में एवं इब्न-ए-माजह ने रिवायत किया है
"अज़ान तथा इक़ामत के बीच की जाने वाली दुआ रद्द नहीं होती।"
स़ह़ीह़ इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी और नसई ने रिवायत किया है
"जिसने खाना खाने के बाद यह दुआ पढ़ीः 'الحمدُ للهِ الذي أَطْعَمَنِي هَذَا، وَرَزَقْنِيهِ مِنْ غَيرِ حَوْلٍ مِنِّي وَلَا قُوَّةٍ' (अर्थात - सारी प्रशंसा अल्लाह की है, जिसने मुझे यह खाना खिलाया तथा यह रोज़ी दी, जबकि इसमें मेरी शक्ति तथा सामर्थ्य का कोई दख़ल नहीं है) उसके पिछले सारे गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं।"
ह़सन इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया है
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से पूछा गया कि कौन-सी चीज़ लोगों को जन्नत में सबसे अधिक प्रवेश कराएगी, तो आपने कहा : “अल्लाह का डर और अच्छा व्यवहार।” इसी तरह आपसे पूछा गया कि कौन-सी चीज़ लोगों को जहन्नम में सबसे अधिक प्रवेश कराएगी, तो आपने कहा : “मुँह और गुप्तांग।”
ह़सन सह़ीह़ इसे तिर्मिज़ी, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया है
"कंजूस वह व्यक्ति है, जिसके सामने मेरा नाम लिया जाए और वह मुझपर दरूद न भेजे।"
स़ह़ीह़ इसे तिर्मिज़ी ने तथा नसई ने अल-सुनन अल-कुबरा में एवं अह़मद ने रिवायत किया है
"अल्लाह ने एक उदाहरण दिया है। एक सीधा रास्ता है। रास्ते के दोनों ओर दो दीवारें हैं। दोनों दीवारों में कुछ द्वार खुले हैं। उन द्वारों पर पर्दे लटके हुए हैं। रास्ते के द्वार पर पुकारने वाला कह रहा है : ऐ लोगो! सब के सब इस राह में दाख़िल जाओ और इधर-उधर न भठको। जबकि एक और पुकारने वाला रास्ते के ऊपर से पुकार रहा है। जब कोई बंदा उन द्वारों में से किसी द्वार को खोलना चाहता है, तो कहता है : तेरा बुरा हो, इसे मत खोल। अगर तू इसे खोलेगा, तो इसमें घुस जाएगा। वह रास्त इस्लाम है, दोनों दीवारें अल्लाह की सीमाएँ हैं, खुले हुए द्वार अल्लाह की हराम की हुई चीज़ें हैं, रास्ते के एक सिरे पर उपस्थित पुकारने वाले अल्लाह की किताब है और रास्ते के ऊपर से पुकारने वाला हर मुसलमान के दिल में मौजूद अल्लाह का नसीहत करने वाला है।"
स़ह़ीह़ इसे तिर्मिज़ी और अह़मद ने रिवायत किया है