Skip to content
621 हदीसें

नबवी हदीसों का विश्वकोश

परिणाम फ़िल्टर करें

621 में से 56 कार्ड

फ़िल्टर हटाएँ
"कोई भी वस्तु तराज़ू में अच्छे आचरण से ज़्यादा भारी नहीं होगी और अल्लाह ऐसे व्यक्ति से नफ़रत करता है, जो बदज़ुबान और अनर्गल बकने वाला हो।"
स़ह़ीह़ इस ह़दीस़ को अबू दावूद और तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है
"आसानी पैदा करो और कठिनाई में न डालो तथा सुसमाचार सुनाओ एवं घृणा मत दिलाओ।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
"जो अल्लाह एवं अंतिम दिवस पर ईमान रखता हो, वह अच्छी बात करे या चुप रहे, जो अल्लाह तथा अंतिम दिवस पर ईमान रखता हो, वह अपने पड़ोसी को सम्मान दे एवं जो अल्लाह तथा अंतिम दिवस पर ईमान रखता हो, वह अपने अतिथि का सत्कार करे।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
"मुसलमान को गाली देना फ़िस्क़ (घोर पाप) है, और उससे लड़ाई करना कुफ़्र है।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
एक व्यक्ति ने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से कहा कि मुझे वसीयत कीजिए, तो आपने फ़रमाया : "गुस्सा मत किया करो।" उसने कई बार अपनी बात दोहराई और आपने हर बार यही कहा कि "गुस्सा मत किया करो।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है
"क्या मैं तुम्हें यह न बताऊँ कि तुममें से अच्छा कौन है और बुरा कौन?" यह सुनकर लोग चुप रहे, तो आपने यह बात तीन बार कही। फिर एक व्यक्ति ने कहा : अवश्य, ऐ अल्लाह के रसूल! हमें बताइए कि हममें से अच्छा कौन है और बुरा कौन। तो फ़रमाया : "तुममें सबसे अच्छा वह है, जिससे भलाई की आशा की जाए और जिसकी बुराई से लोग सुरक्षित रहें, और तुममें सबसे बुरा वह है, जिससे भलाई की आशा न की जाए और जिसकी बुराई से लोग सुरक्षित न रहें।"
स़ह़ीह़ इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है
नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के ज़माने में एक आदमी था जिसका नाम अब्दुल्लाह था, और उसे हिमार का लक़ब दिया गया था। वह रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को हंसाया करता था, और नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उसे शराब पीने पर सज़ा दी थी। फिर एक दिन उसे लाया गया और आपके हुक्म पर उसे कोड़े मारे गए, तो क़ौम में से एक आदमी ने कहा : ऐ अल्लाह, इसपर लानत कर, इसे कितनी बार लाया जा चुका है? तब नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया : "उसपर लानत न भेजो, अल्लाह की क़सम! मुझे मालूम है कि वह अल्लाह और उसके रसूल से प्रेम करता है।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है
मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से नेकी और गुनाह के बारे में पूछा, तो आपने उत्तर दिया : "नेकी तो अच्छा व्यवहार है और गुनाह वह है जो तेरे दिल में खटके और तुझे यह बुरा लगे कि लोग उसे जान जाएँ।"
स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है