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नबवी हदीसों का विश्वकोश

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"अपनी सफ़ें सीधी कर लिया करो; क्योंकि सफ़ों को सीधा करने का संबंध नमाज़ की पूर्णता से है।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
"अगली सफ़ को पूरा करो, फिर उसके बाद वाली को, और यदि (नमाज़ियों की संख्या कम होने के कारण) सफ़ में कोई कमी रह जाए, तो वह सबसे पिछली सफ़ में होनी चाहिए।"
स़ह़ीह़ इसे अबू दावूद तथा नसई ने रिवायत किया है
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब नमाज़ समाप्त करते, तो तीन बार अल्लाह से क्षमा माँगते और यह दुआ पढ़ते : "ऐ अल्लाह! तू ही शांति वाला है और तेरी ओर से ही शांति है। तू बरकत वाला है ऐ महानता और सम्मान वाले!" वलीद कहते हैं : मैंने औज़ाई से कहा : क्षमा कैसे माँगी जाए? उन्होंने उत्तर दिया : तुम बस इतना कहो : मैं अल्लाह से क्षमा माँगता हूँ, मैं अल्लाह से क्षमा माँगता हूँ।
स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
वह हर नमाज़ में तकबीर कहा करते थे। नमाज़ फ़र्ज़ हो कि नफ़ल। रमज़ान में हो कि दूसरे महीनों में। वह खड़े होते समय तकबीर कहते, फिर रुकू में जाते समय तकबीर कहते, फिर "سَمِعَ اللهُ لِمَنْ حَمِدَهُ" कहते, फिर सजदे में जाने से पहले "رَبَّنَا وَلَكَ الْحَمْدُ" कहते, फिर सजदे के लिए झुकते समय तकबीर कहते, फिर सजदे से सर उठाते समय तकबीर कहते, फिर सजदे में जाते समय तकबीर कहते, फिर सजदे से सर उठाते समय तकबीर कहते, फिर दो रकात पूरी होने के बाद की बैठक से खड़े होते समय तकबीर कहते और ऐसा नमाज़ पूरी होने तक हर रकात में करते। फिर नमाज़ पूरी करने के बाद कहते : उस हस्ती की क़सम, जिसके हाथ में मेरी जान है, मैं तुम्हारे बीच अल्लाह के रसूल से सबसे ज़्यादा मिलती-जुलती नमाज़ पढ़ने वाला व्यक्ति हूँ। दुनिया छोड़ने तक आप इसी तरह नमाज़ पढ़ते रहे।
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
वह अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास आए और कहने लगे : ऐ अल्लाह के रसूल! शैतान मेरे, मेरी नमाज़ तथा मेरी तिलावत के बीच रुकावट बनकर खड़ा हो जाता है। मुझे उलझाने के प्रयास करता है। यह सुन अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "यह एक शैतान है, जिसे ख़िंज़िब कहा जाता है। जब तुम्हें उसके व्यवधान डालने का आभास हो, तो उससे अल्लाह की शरण माँगो और तीन बार अपने बाएँ ओर थुत्कारो।" उनका कहना है कि मैंने इसपर अमल करना शुरू किया, तो अल्लाह ने मेरी इस परेशानी को दूर कर दिया।
स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
"जिसने प्रत्येक फर्ज़ नमाज़ के पश्चात आयतुल कुर्सी पढ़ी, उसको जन्नत में जाने से मौत के सिवा कोई चीज़ रोक नहीं सकती।"
स़ह़ीह़ इसे नसई ने अल-कुबरा में रिवायत किया है
"जब तुम नमाज़ पढ़ो तो अपनी सफ़ें सठीक कर लो। फिर तुममें से एक व्यक्ति तुम्हारी इमामत करे। फिर जब वह तकबीर कहे, तो तुम तकबीर कहो और जब वह {غَيْرِ الْمَغْضُوبِ عَلَيْهِمْ وَلا الضَّالِّينَ} [सूरा अल-फ़ातिहा : 7] कहे, तो तुम आमीन कहो, अल्लाह तुम्हारी दुआ ग्रहण करेगा। फिर जब तकबीर कहे और रुकू करे, तो तुम भी तकबीर कहो और रुकू करो। इमाम तुमसे पहले रुकू में जाएगा और तुमसे पहले रुकू से उठेगा।" अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "तुम्हारे रुकू में जाने में जो क्षण भर की देर होगी, वह रुकू से उठने में होने वाली क्षण भर की देर से पूरी हो जाएगी। तथा जब इमाम "سَمِعَ اللهُ لِمَنْ حَمِدَهُ" कहे, तो तुम "اللَّهُمَّ رَبَّنَا لَكَ الْحَمْدُ" कहो, अल्लाह तुम्हारी दुआ को सुन लेगा। तथा जब वह तकबीर कहे और सजदे में जाए, तो तुम भी तकबीर कहो और सजदे में जाओ। इमाम तुमसे पहले सजदे में जाएगा और तुमसे पहले उठेगा। इसके बाद अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "तुम्हारे सजदे में जाने में जो क्षण भर की देर होगी, वह सजदे से उठने में होने वाली क्षण भर की देर से पूरी हो जाएगी। तथा जब जलसे में बैठे, तो सबसे पहले यह दुआ पढ़े : التَّحِيَّاتُ الطَّيِّبَاتُ الصَّلَوَاتُ لِلهِ، السَّلَامُ عَلَيْكَ أَيُّهَا النَّبِيُّ وَرَحْمَةُ اللهِ وَبَرَكَاتُهُ، السَّلَامُ عَلَيْنَا وَعَلَى عِبَادِ اللهِ الصَّالِحِينَ، أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ"
स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
"जिसने सूरा-ए-फ़ातिहा नहीं पढ़ी, उसकी नमाज़ ही नहीं।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है