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621 हदीसें

नबवी हदीसों का विश्वकोश

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हदीस का दर्जा

"इस्लाम की बुनियाद पाँच चीज़ों पर क़ायम है : इस बात की गवाही देना कि अल्लाह के अतिरिक्त कोई सत्य पूज्य नहीं है और मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अल्लाह के रसूल हैं, नमाज़ स्थापित करना, ज़कात देना, हज करना और रमज़ान मास के रोज़े रखना।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
"तुममें से जो जुमे की नमाज़ के लिए आए, वह स्नान कर ले।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब नमाज़ शुरू करते और जब रुकू के लिए "अल्लाहु अकबर" कहते, तो अपने दोनों हाथों को अपने दोनों कंधो के बरारब उठाते। रूकू से सिर उठाते समय भी इसी तरह दोनों हाथों को उठाते और कहते : "سَمِعَ الله لمن حَمِدَهُ رَبَّنَا ولك الحمد" (अल्लाह ने उसकी सुन ली, जिसने उसकी प्रशंसा की। ऐ हमारे रब, तेरी ही प्रशंसा है।) लेकिन सजदे में दोनों हाथों को उठाते नहीं थे।
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से दस रकात सीखी हैं। ज़ोहर से पहले दो रकात, उसके बाद दो रकात, मग्रिब के बाद घर में दो रकात, इशा के बाद घर में दो रकात और सुबह की नमाज़ से पहले दो रकात। दरअसल यह ऐसा समय था, जब अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के यहाँ कोई जाता नहीं था। मुझे हफ़सा ने बताया कि जब मुअज़्ज़िन अज़ान देता और फ़ज्र नमूदार हो जाता, तो आप दो रकात पढ़ते। जबकि एक स्थान में है : अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जुमा के बाद दो रकात पढ़ते थे।
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने तमाम रिवायतों के साथ नक़ल किया है
एक व्यक्ति ने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से, जब आप मिंबर पर थे, पूछा : रात की नमाज़ के बारे में आप क्या कहते हैं? आपने फरमाया : "दो-दो रकात पढ़ा करो, फिर जब सुबह हो जाने का डर हो तो एक रकात पढ़ लो, यह उसकी पढ़ी हुई नमाज़ को वित्र (विषम) बना देगी।" और आप फ़रमाया करते थे : "अपनी अंतिम नमाज़ वित्र को बनाओ," क्योंकि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इसका आदेश दिया है।
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है