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621 हदीसें

नबवी हदीसों का विश्वकोश

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हदीस का दर्जा

"शैतान तुममें से हर व्यक्ति के सर के पीछ रात में सोते समय तीन गाँठ लगा देता है और हर गाँठ पर यह कहकर फूँक मारता है कि सो जा, अभी रात बहुत बाक़ी है। फिर अगर आदमी जागकर अल्लाह को याद करने लगे, तो एक गाँठ खुल जाती है। फिर अगर वज़ू कर ले तो एक और गाँठ खुल जाती है। फिर अगर नमाज़ पढ़ ले तो एक और गाँठ भी खुल जाती है। इस तरह सुबह के समय आदमी चुस्त और प्रफुल्लित रहता है। वरना, उदास और सुस्त रहता है।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
"जब तुममें से किसी का वज़ू टूट जाए, तो जब तक वज़ू न कर ले, अल्लाह उसकी नमाज़ ग्रहण नहीं करता।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
"पाँच चीज़ें (मानव) प्रकृति (का हिस्सा) हैं ; ख़त्ना करना, नाभी के नीचे के बाल मूँडना, मूँछें छोटी करना, नाख़ून काटना और बग़ल के बाल उखाड़ना।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
"जब तुममें से किसी के बरतन में से कुत्ता पी ले, तो वह उसे सात बार धोए।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
"जब तुममें से कोई वज़ू करे, तो अपनी नाक में पानी डालकर नाक झाड़े, और जो ढेलों से इस्तिंजा (शौच या मूत्र से पवित्रता अर्जन) करे, वह बेजोड़ (विषम) संख्या प्रयोग करे, और जब तुममें से कोई नींद से जागे, तो अपने हाथों को बरतन में डालने से पहले धो ले, क्योंकि तुममें से किसी को नहीं पता कि रात के समय उसका हाथ कहाँ-कहाँ गया है।" सहीह मुस्लिम के शब्द हैं : "जब तुममें से कोई नींद से जागे, तो अपने हाथ को बरतन में उस समय तक न डुबोए, जब तक उसे तीन बार न धो ले। क्योंकि उसे नहीं पता कि रात के समय उसका हाथ कहाँ-कहाँ गया है।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
"जब तुममें से कोई नींद से जागे, तो तीन बार अपनी नाक में पानी डालकर झाड़ ले, क्योंकि शैतान उसकी नाक के अंदर रात गुज़ारता है।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
"जिसने जुमे के दिन जनाबत (सहवास के बाद) का स्नान किया, फिर पहली घड़ी में मस्जिद की ओर चल पड़ा, उसने गोया एक ऊँट की क़ुरबानी दी; जो दूसरी घड़ी में गया, उसने गोया एक गाय की क़ुरबानी दी; जो तीसरी घड़ी में गया, उसने गोया एक मेंढे की क़रबानी दी; जो चौथी घड़ी में गया, उसने गोया एक मुर्गी दान की और जो पाँचवीं घड़ी में निकला, उसने गोया एक अंडा दान किया। फिर जब इमाम निकल आता है, तो फ़रिश्ते उपस्थित होकर ख़ुतबा सुनने लगते हैं।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
एक व्यक्ति ने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! हम समुद्री यात्रा पर निकलते हैं और हमारे साथ थोड़ा-सा पानी होता है। उससे वज़ू कर लें, तो प्यासे रह जाएँगे। ऐसे मे क्या हम समुद्र के पानी से वज़ू कर लिया करें? अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उत्तर दिया : "समुद्र का पानी स्वयं पाक है एवं दूसरों को पाक करने वाला है और उसका मरा हुआ जानवर हलाल है।"
स़ह़ीह़ इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी, नसई, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया है