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621 हदीसें

नबवी हदीसों का विश्वकोश

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हदीस का दर्जा

नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने उनको यमन की ओर भेजा और उन्होंने आपसे कुछ पीने की चीज़ों के बारे में पूछा जो वहाँ बनाई जाती थीं, तो आपने फ़रमाया : “वह क्या हैं?” उन्होंने कहा : बित्अ तथा मिज़्र। (बाद में) अबू बुरदा से इन दोनों शब्दों का अर्थ पूछा गया, तो उन्होंने फ़रमाया : बित्अ से मुराद शहद से बनने वाली नबीज़ और मिज़्र से मुराद जौ से बनने वाली नबीज़ है। चुनांचे अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : “हर नशे वाली वस्तु हराम है।” इस हदीस को इमाम बुख़ारी ने रिवायत किया है।
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
"हर नशे वाली वस्तु शराब है और हर नशे वाली वस्तु हराम है। जिसने दुनिया में शराब पी और इसी लत के साथ तौबा किए बिना मर गया, वह आख़िरत में उससे वंचित रहेगा।"
स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है, जबकि बुख़ारी ने इसका अंतिम वाक्य रिवायत किया है
“अल्लाह ने हर चीज़ में अच्छे बर्ताव को अनिवार्य किया है। अतः, जब क़त्ल करो, तो अच्छे अंदाज़ में क़त्ल करो और जब ज़बह करो, तो अच्छे अंदाज़ में ज़बह करो। तुम अपनी छुरी को तेज़ कर लो और अपने ज़बीहे को आराम पहुँचाओ।"
स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने हर नुकीले दाँत वाले दरिंदे और नाखून (से शिकार करने) वाले परिंदे (का मांस खाने) से मना किया है।
स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने दो चितकबरे, सींग वाले मेढ़ों की क़ुरबानी की। दोनों को अपने हाथ से ज़बह किया, बिस्मिल्लाह कहा, अल्लाहु अकबर कहा और अपना पाँव दोनों की गरदनों पर रखा।
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
"निःसंदेह अल्लाह और उसके रसूल ने शराब, मरे हुए जानवर, सुअर और मूर्तियों को हराम किया है।" किसी ने कहा कि ऐ अल्लाह के रसूल! मरे हुए जानवर की चरबी के बारे में आपका क्या आदेश है, जिसे लोग कश्तियों पर मलते हैं, खालों पर लगाते हैं और उससे चिराग भी जलाते हैं? आपने फ़रमाया : "नहीं, वह भी हराम है।" इसके बाद फ़रमाया : "अल्लाह, यहूदियों को हलाक करे, अल्लाह ने उनपर उनकी (अर्थाथ; जानवरों की) चरबियों को हराम किया, तो उसे पिघलाया, फ़िर बेचा और उसका पैसा खाया।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
"जो हमारी नमाज़ की तरह नमाज़ पढ़े और हमारे क़िबले की तरफ मुंह करे और हमारा क़ुर्बान किया हुआ जानवर खाए तो वह ऐसा मुसलमान है, जिसे अल्लाह और उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की पनाह हासिल है । लिहाज़ा अल्लाह की पनाह में ख़यानत (धोखा) न करो।"
स़ह़ीह़ इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है
"अल्लाह ने हर चीज़ के साथ अच्छे बर्ताव को अनिवार्य किया है। अतः जब तुम (मृत्यु दण्ड आदि के लिए) किसी का वध करो तो अच्छे ढंग से वध करो और जब (पशुओं को) ज़बह करो तो अच्छे ढंग से ज़बह करो। तुम अपनी छुरी की धार को तेज़ कर लो और अपने ज़बीहा -ज़बह किए जाने वाले पशु- को आराम पहुँचाओ।"
स़ह़ीह़ इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है